जेएनयू विवाद : प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय बंद करने की मांग की (लीड-1)

नई दिल्ली, 16 फरवरी (आईएएनएस)। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के अंदर और बाहर प्रदर्शनों का दौर मंगलवार को भी जारी रहा। बाहर हुए एक प्रदर्शन में विश्वविद्यालय के खिलाफ नारे लगाते हुए इसे बंद करने की मांग की गई।

जेएनयू के प्रवेशद्वार पर कड़ी सुरक्षा की गई थी। पुलिस ने बैरिकेड लगा रखे थे। पुलिस के साथ साथ अर्धसैनिक बलों को भी बाहरी लोगों को परिसर में घुसने से रोकने के लिए तैनात किया गया था।

कहा जा रहा है कि जेएनयू गेट पर प्रदर्शन करने वालों का संबंध विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल से था। भगवा झंडे लहराते इन लोगों ने ‘जेएनयू प्रशासन बंद करो’ जैसे नारे लगाए।

इनका कहना था कि 9 फरवरी को संसद हमले के दोषी अफजल गुरु की बरसी पर हुए कार्यक्रम में देश विरोधी नारे लगाने वालों को गिरफ्तार किया जाए।

विश्वविद्यालय के प्रवेशद्वार पर लगे बैरिकेड को लांघने की कोशिश कर रहे एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “उन राष्ट्र विरोधी तत्वों को गिरफ्तार करो। हमारा प्रदर्शन देश के पक्ष में है।”

प्रदर्शनकारियों ने ‘गोली मारो इन देशद्रोहियों को’ नारा भी लगाया।

यह प्रदर्शन जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की देशद्रोह के आरोप में हुई गिरफ्तारी के खिलाफ विश्वविद्यालय में हुए कई प्रदर्शनों के बाद किया गया।

विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रही। छात्र कन्हैया कुमार की रिहाई की मांग कर रहे हैं।

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (जेएनयूटीए) ने विश्वविद्यालय परिसर में दिल्ली पुलिस को तलाशी अभियान और छात्रों की गिरफ्तारी की अनुमति देने के कुलपति एम.जगदीश कुमार के फैसले पर मंगलवार को सवाल उठाया और इस अनुमति को वापस लेने की मांग की।

कुलपति के नाम पत्र में जेएनयूटीए ने लिखा है, “अंधाधुंध तलाशी और हमारे बच्चों की गिरफ्तारी के लिए दिल्ली पुलिस को असीमित अधिकार देने वाला आपका पत्र निहायत आपत्तिजनक है।”

पत्र में कहा गया है, “हम आपसे आग्रह करते हैं कि कृपया एक पत्र जारी कर पूर्व में पुलिस को दी गई औपचारिक अनुमति वापस लें और हमारे समुदाय की नजरों में हमारे प्रशासन की साख को फिर से बहाल करें।”

पत्र में कहा गया है, “संसद के बनाए कानून पर आधारित हमारे विश्वविद्यालय के नियमों के तहत बने हमारे अपने संस्थागत तंत्र को जांच के लिए नष्ट करना कई सवाल खड़े कर रहा है।”

खबरों के मुताबिक, 11 फरवरी को दिल्ली पुलिस को विश्वविद्यालय रजिस्ट्रार की तरफ से भेजे गए पत्र में कहा गया है, “कुलपति पुलिस को इसकी अनुमति देते हैं कि यदि जरूरत हो और उचित हो तो वह जेएनयू परिसर में प्रवेश कर सकती है।”

कुलपति ने सोमवार को कहा था कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने पुलिस नहीं बुलाई थी।

जगदीश कुमार ने कहा, “हमने पुलिस को नहीं बुलाया। पुलिस ने हमें पत्र भेजा था। इसमें कहा गया था कि अज्ञात लोगों के खिलाफ देशद्रोह के मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है और वे हमसे जांच में सहयोग चाहते हैं। हमने उन्हें कानून के तहत कर्तव्य पालन के लिए प्रवेश की अनुमति दी।”

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