रांची, 27 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ताला मरांडी को नियुक्ति के सिर्फ 13 सप्ताह बाद ही पद से हटा दिया गया। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि जनजातियों के भूमि अधिकार की सुरक्षा करने वाले कानून में प्रस्तावित बदलाव को लेकर उन्होंने अपनी ही पार्टी की सरकार की आलोचना की थी। उनकी इस मुखरता का उनकी बर्खास्तगी से व्यापक संबंध है।
रांची, 27 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ताला मरांडी को नियुक्ति के सिर्फ 13 सप्ताह बाद ही पद से हटा दिया गया। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि जनजातियों के भूमि अधिकार की सुरक्षा करने वाले कानून में प्रस्तावित बदलाव को लेकर उन्होंने अपनी ही पार्टी की सरकार की आलोचना की थी। उनकी इस मुखरता का उनकी बर्खास्तगी से व्यापक संबंध है।
ध्यान रहे कि छत्तीसगढ़ की तरह झारखंड में भी भाजपा के मुख्यमंत्री आदिवासी नेता नहीं हैं, जबकि इन दोनों राज्यों में बहुलता आदिवासियों की है। ताला मरांडी आदिवासी नेता हैं और आदिवासियों की जमीन को लेकर उनकी चिंता वाजिब है।
बोरिओ विधानसभा क्षेत्र से विधायक संथाल नेता ताला मरांडी की जगह चाईबासा से लोकसभा सदस्य, एक अन्य जनजातीय नेता लक्ष्मण गुलिया को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनाया गया है।
कहा जा रहा है कि कई विवादों में फंसने के बाद मरांडी को उनके पद से हटाया गया है, जिनमें उनके बेटे के खिलाफ यौन शोषण का आरोप भी शामिल है।
मरांडी संथालपरगना के रहने वाले हैं और यह क्षेत्र झाारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) का गढ़ माना जाता है। झामुमो को टक्कर देने के लिए उन्हें भाजपा अध्यक्ष बनाया गया था। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनने वाले वह पहले संथाली नेता थे।
ताला मरांडी को सरकार और जनजातीय लोगों के बीच सेतु का काम करना था, खास तौर पर तब, जब प्रदेश पहली बार एक गैर जनजातीय मुख्यमंत्री रघुवर दास दास द्वारा शासित है।
राज्य में 27 प्रतिशत जनजातीय जनसंख्या है और यह समाज भाजपा का एक बड़ा वोट बैंक है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, रघुवर दास मरांडी से खुश नहीं थे और उन्होंने पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से शिकायत भी की थी। केंद्रीय नेतृत्व ने दास की सुनी और मरांडी को कोल्हन क्षेत्र के एक अन्य जनजातीय नेता से बदल दिया।
मरांडी के लिए सबसे पहले परेशानी तब शुरू हुई, जब उनके बेटे पर यौन शोषण का आरोप लगा और उसके बाद कथित रूप से उसकी शादी एक नाबालिग लड़की से कर दी गई।
यह विवाद अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि छोटानागपुर काश्तकारी कानून और संथाल परगना काश्तकारी कानून में राष्ट्रपति को प्रेषित अध्यादेश के जरिए प्रस्तावित बदलाव के मुद्दे पर मरांडी विपक्ष के साथ हो गए और उन्होंने सरकार की आलोचना की।
मरांडी ने कहा था, “दोनों भूमि कानून में कोई बदलाव राज्य में जनजातियों के अस्तित्व पर सवाल खड़ा कर देगा।”
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के बयान से विपक्ष को सरकार पर हमला करने के लिए बल मिला। झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि काश्तकारी कानून में बदलाव के खिलाफ भाजपा के एक दर्जन विधायक उनके संपर्क में हैं।
मरांडी की मुखरता से शर्मसार भाजपा को उन्हें हटाने का मौका तब मिल गया, जब उन्होंने अपनी 50 सदस्यीय टीम की घोषणा की। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा की पत्नी मीरा मुंडा समेत छह लोगों ने उनकी टीम में शामिल होने से मना कर दिया।
मरांडी ने प्रदेश अध्यक्ष पद पर रहते वीर विजय प्रधान को भाजपा युवा मोर्चा का अध्यक्ष बना दिया, जिसका बड़े पैमाने विरोध हुआ। युवा संगठन के कई नेता धरना पर बैठ गए। पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने युवा नेताओं का समर्थन किया।
आखिरकार ताला मरांडी को दिल्ली बुलाया गया और आलाकमान की एक प्रक्रिया की परिणति झारखंड अध्यक्ष पद से उनके इस्तीफे के रूप में हुई।
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