रांची, 10 अगस्त (आईएएनएस)। ऐसा प्रतीत होता है कि झारखंड भाजपा अध्यक्ष ताला मरांडी ने अपनी पार्टी के केंद्रीय और प्रादेशिक नेताओं से फिर झगड़ा मोल ले लिया है। इस बार उन्होंने एक अध्यादेश का विरोध किया और पार्टी की राज्य इकाई में अपनी टीम की घोषणा की।
भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के केंद्रीय नेतृत्व ने मरांडी और मुख्यमंत्री रघुबर दास दोनों को मंगलवार को दिल्ली बुलाया था, जहां दोनों नेताओं ने पार्टी के अन्य नेताओं के अलावा पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात की।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने आईएएनएस से कहा, “ताला मरांडी के कारण पार्टी की छवि को एक बड़ा झटका लगा है। वह मुख्यमंत्री के साथ मिलकर काम करने और पार्टी के नेताओं के दिल जीतने में विफल रहे हैं। केंद्रीय नेता मरांडी से नाखुश हैं। उनकी नई टीम भंग हो सकती है और उन्हें भी बदला जा सकता है।”
जनजातीय नेता मरांडी तब सुर्खियों में थे, जब उनके बेटे मुन्ना मरांडी ने गत जून महीने में कथित रूप से एक नाबालिग लड़की से शादी की थी।
एक आदिवासी लड़की ने मुन्ना पर यौन शोषण का भी आरोप लगाया था। इसके बाद जिस लड़की के साथ उसकी शादी तय हुई थी, उसने मुन्ना के साथ शादी करने मना कर दिया था।
झारखंड में रघुबर दास की एक गैर आदिवासी मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्ति के बाद संतुलन बनाने के लिए ताला मरांडी को भजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। बताया जाता है कि उनकी कार्यशैली से केंद्रीय नेतृत्व नाराज है।
मरांडी ने छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम में संशोधन के राज्य सरकार के फैसले का विरोध किया है। केंद्र सरकार की परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण को आसान बनाने के लिए सरकार दोनों कानूनों में संशोधन करना चाहती है।
राज्य सरकार ने इस आशय का एक अध्यादेश मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेज दिया है।
मूल रूप से ये कानून आदिवासियों और स्थानीय लोगों के भूमि अधिकार की सुरक्षा के लिए बनाए गए थे।
मरांडी ने कहा था, “जल्दबाजी में अध्यादेश लाया गया। भूमि कानूनों में संशोधन की कोई आवश्यकता नहीं है। अगर प्रस्तावित संशोधन को मंजूरी मिलती है तो आदिवासी और मूलवासी की पहचान खतरे में पड़ जाएगी। मैं नहीं समझता हूं कि इन दोनों कानूनों से विकास बाधित होता है।”
बताया जाता है कि मरांडी द्वारा गत रविवार को अपनी टीम की घोषणा की बाद से झारखंड भाजपा में भारी नाराजगी है। प्रमुख पदों पर नियुक्त भाजपा के चार नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है, जिनमें प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा की पत्नी मीरा मुंडा और सचिव अजय नाथ साहदेव भी शामिल हैं।
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