रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड में मुख्यमंत्री रघुवर दास की सरकार द्वारा अध्यादेश के माध्यम से दो भूमि कानूनों में बदलाव के फैसले पर राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में दरार पैदा हो गई है।
केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ताला मरांडी के साथ पार्टी के विधायकों के एक धड़े ने सरकार के कदम पर चिंता जताई है।
रघुवर दास की सरकार ने दो भूमि कानूनों -छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी) तथा संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (एसपीटी)- में बदलाव का प्रस्ताव किया है, जो जनजाति समुदाय के लोगों तथा स्थानीय निवासियों का भूमि पर अधिकारों का संरक्षण करता है।
राष्ट्रपति अगर इस अध्यादेश पर हस्ताक्षर कर देते हैं और बदलाव को शामिल कर इसे प्रभाव में लाया जाता है, तो केवल खनन और उद्योगों के लिए होने वाली झारखंड की भूमि का इस्तेमाल सड़कों, बिजली, विकास कार्यो व अन्य उद्देश्यों के लिए भी किया जा सकेगा।
ताला मरांडी ने कहा, “अध्यादेश जल्दबाजी में लाया गया है। भूमि कानूनों में बदलाव लाने की कोई जरूरत नहीं है। यदि प्रस्तावित बदलाव को अमल में लाया जाता है, तो जनजातियों व मूल वासियों की पहचान खतरे में पड़ जाएगी। मुझे नहीं लगता कि विकास कार्य दोनों भूमि कानूनों से प्रभावित होता है।”
मरांडी के बयान से राज्य सरकार को असहजता का सामना करना पड़ रहा है।
भाजपा के एक अन्य विधायक शिव शंकर उरांव ने इससे पहले कहा, “जनजाति सलाहकार समिति की बैठक में हमें अंधेरे में रखा गया।”
मुख्य विपक्षी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कार्यकारी अध्यक्ष तथा पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेने ने कहा, “भूमि का अधिग्रहण मॉल, सिनेमाघरों तथा अन्य उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। इसे मूकदर्शक बनकर नहीं देख सकते, क्योंकि यह राज्य के लोगों की पहचान का सवाल है।”
भाजपा के जनजाति व मूलवासी नेता रघुवर दास की अधिवास नीति से भी खफा हैं, जिसे इस साल अप्रैल में लाया गया था और अब यह अध्यादेश। लोकसभा के चार सदस्य अधिवास नीति में बदलाव की मांग करते हुए राज्यपाल को पत्र लिख चुके हैं।
जनजाति समुदाय से ताल्लुक रखने वाले भाजपा के एक विधायक ने कहा, “रघुवर दास जनजाति व मूलवासी दोनों की ही भावनाओं से खेल रहे हैं। वह दोनों में से किसी समुदाय से ताल्लुक नहीं रखते। उनके इस कदम से पार्टी को नुकसान होगा, क्योंकि दोनों मुद्दों पर विपक्ष गोलबंद है। केंद्रीय नेताओं को हस्तक्षेप करना होगा। मुख्यमंत्री को शासन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।”
विपक्षी पार्टियां तथा भाजपा गठबंधन के घटक दल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) ने मुद्दे को लेकर अपना आंदोलन तेज कर दिया है। आजसू ने ‘जन की बात’ की शुरुआत की है, जिसमें उसने सरकार पर पार्टी को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है।
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