नई दिल्ली, 27 मार्च (आईएएनएस)। दिल्ली यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (डीयूटीए) ने सोमवार को विश्वविद्यालय के कुलपति से अस्थायी और तदर्थ शिक्षकों को स्थायी करने की प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह किया।
डीयूटीए की अध्यक्ष नंदिता नारायण ने कुलपति योगेश त्यागी को लिखे एक पत्र में कहा, “सहायक प्रोफेसर की जरूरी अकादमिक योग्यताओं को पूरा करने व अनुभवी होने के बावजूद इन शिक्षकों को अस्थायी/तदर्थ तौर पर कई सालों से कार्य करने के लिए छोड़ दिया गया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि दिल्ली विश्वविद्यालय ने नियमित नियुक्तियों के लिए साक्षात्कार करना बंद कर दिया है।”
नंदिता नारायण ने शिक्षकों की दुदर्शा को रेखांकित करते हुए कहा कि करीब 4500 या दिल्ली विश्वविद्यालय के करीब 50 फीसदी शिक्षक वेतन वृद्धि, छुट्टी, करियर में वृद्धि, चिकित्सा क्षतिपूर्ति जैसे लाभ और इन सबसे बढ़कर गरिमापूर्ण जीवन से वंचित हैं।
डीयूटीए के उपाध्यक्ष सी.एस.रावत ने आईएएनएस से कहा, “ये शिक्षक बहुत सारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं और इनके वैध अधिकारों से इन्हें वंचित किया जा रहा है। कुलपति हमसे मुलाकात नहीं करते और जब वह मिलते हैं तो इन मुद्दों पर बात नहीं करते।”
रावत ने कहा, “तदर्थ से स्थायी करने की प्रक्रिया पिछले वीसी दिनेश सिंह द्वारा शुरू की गई जिसे 2016 में त्यागी ने अपनी नियुक्ति के तुरंत बाद निरस्त कर दिया।”
डीयूटीए के उपाध्यक्ष ने कहा, “कार्यकारी परिषद के कई शिक्षक सदस्य भारतीय जनता पार्टी के सदस्य हैं, वह इन मुद्दों को कभी नहीं उठाते और अपनी पार्टी के कहे अनुसार चलते हैं। इन वजहों से शिक्षक बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं।”
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