डॉक्टर सुनें मरीज की बात : आईएमए

नई दिल्ली, 28 जनवरी (आईएएनएस)। अस्पतालों और क्लिनिक्स में डॉक्टर कई स्रोतों से आने वाली जानकारियों से भरे रहते हैं। इतनी ज्यादा सूचनाओं की बाढ़ में मरीज को अच्छी तरह से और पूरी एकाग्रता के साथ सुनना मुश्किल होता है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने इस समस्या पर गौर करते हुए ‘सुन तो लो’ अभियान शुरू किया है, जो इस बात पर जोर देता है कि डॉक्टर मरीजों की बात थोड़े धैर्य के साथ सुन लें।

आईएमए के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा, “मरीज-डॉक्टर के आपसी संवाद के बारे में हुए अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि मरीज की बात सुनते समय डॉक्टर 18 सेकेंड इंतजार करते हैं और अपनी बात कह देते हैं। 60 प्रतिशत मामलों में मरीज की बात सही तरह से समझी नहीं जाती। लिहाजा चिकित्सा क्षेत्र में सुनने का गुण विकसित करना अहम हो गया है।”

उन्होंने कहा, “डॉक्टरों में सुनने की कुशलता एक मूलभूत गुण है, जो कि मरीज और डॉक्टर के मध्य एक बेहतर संवाद बना सकता है। मानसिक स्वास्थ्य में सलाह देते समय यह बेहद अहम हो सकता है। जब डॉक्टर मरीज की बात गौर से सुनते हैं तो मरीज को बेहतर देखभाल महसूस होती है और डॉक्टर बेहतर तरीके से इलाज कर पाता है।”

अग्रवाल ने कहा, “भगवान कृष्ण ने भी गीता के प्रथम अध्याय में सुनने के गुण की चर्चा की है, जिसमें भगवान अपना पूरा समय भक्त अर्जुन को सुनने में व्यतीत करते हैं। यही बात हम और हमारे मरीजों पर लागू होती है। मरीज अनावश्यक बातें कर सकता है और बात को लंबा खींच सकता है, लेकिन आप बातचीत को इस तरह से कर सकते हैं कि इलाज के लिए आवश्यक जानकारी प्राप्त हो।”

डॉक्टर इन बातों पर करें गौर :

1. उस मौके और मरीज पर ध्यान केंद्रित रखें।

2. आखें मिला कर बात करने का पूरा लाभ उठाएं।

3. मरीज के भावनात्मक सुर को पहचानें।

4. जवाब देने से पहले पांच से 10 सेकेंड के लिए रुकें।

5. अहम बातों को अलग-अलग तरीकों से जोर देकर कहें।

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