चेन्नई, 28 मई (आईएएनएस)। निर्वाचन आयोग ने शनिवार को कहा कि उसने तमिलनाडु के अरावकुरिचि तथा तंजावुर विधानसभा सीटों पर 13 जून को होने वाला चुनाव स्थगित करने का फैसला किया है और इससे संबंधित एक अनुशंसा राज्यपाल के.रोसैया को भेज दी गई है।
निर्वाचन आयोग ने यह भी कहा कि वह यह कहने को विवश है कि रोसैया को 26 मई को अपनी सिफारिश में यह बात नहीं कहनी चाहिए थी कि दोनों विधानसभा सीटों पर चुनाव एक जून से पहले कराए जाएं।
आयोग ने अपने आदेश में साफ तौर पर कहा कि चुनाव कराने का फैसला पूरी तरह उसके अधिकार क्षेत्र में है।
निर्वाचन आयोग ने 27 मई को जारी अपने आदेश में रोसैया से अरावकुरिचि तथा तंजावुर सीट पर मतदान कराने की अधिसूचना को रद्द करने की सिफारिश की थी।
निर्वाचन आयोग ने कहा, “अरावकुरिचि तथा तंजावुर में मतदान की तारीख का निर्धारण निर्वाचन आयोग उचित समय पर करेगा।”
तमिलनाडु में 16 मई के मतदान से पहले दोनों सीटों पर मतदाताओं को रिश्वत देने की घटना के सबूत सामने आने तथा भारी मात्रा में नकदी बरामद होने के बाद निर्वाचन आयोग ने मतदान की तिथि 16 मई से बढ़ाकर 23 मई तथा मतगणना की तिथि 25 मई तय की थी।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तंजावुर से उम्मीदवार एम.एस.रामालिंगम तथा अरावकुरिचि से पीएमके उम्मीदवार एम.बसकरन तथा अन्य ने मतदान स्थगित करने तथा ताजा चुनाव की तारीख का आदेश जारी करने का अनुरोध किया था।
याचिका की सुनवाई के बाद निर्वाचन आयोग ने दोनों सीटों पर 13 जून को मतदान कराने का फैसला किया।
ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के अरवाकुरिचि से उम्मीदवार सेंतिल बालाजी तथा तंजावुर से उम्मीदवार रंगासामी से मिलने के बाद रोसैया ने जल्द से जल्द मतदान कराने के लिए निर्वाचन आयोग को पत्र लिखा था।
निर्वाचन आयोग के मुताबिक, राज्यपाल द्वारा आयोग को लिखे पत्र का मर्म यही था कि मतदान स्थगित करने से पहले निर्वाचन आयोग को राज्य सरकार से परामर्श लेना चाहिए, लेकिन आयोग ने इस बात का उल्लेख किया कि वह राज्य सरकार से केवल कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर बातचीत कर सकता है न कि मतदान की तिथि के मुद्दे पर।
आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का भी संदर्भ दिया, जिसके मुताबिक किस समय मतदान कराना है, इसका अधिकार केवल निर्वाचन आयोग के पास है।
निर्वाचन आयोग के आदेश के मुताबिक, “निर्वाचन आयोग द्वारा मतदान स्थगित करने का फैसला दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था के आकलन पर आधारित नहीं है, बल्कि यह मतदाताओं को लुभाने के लिए दोनों क्षेत्रों में पैसे का अवैध इस्तेमाल तथा पार्टी एवं उम्मीदवारों द्वारा अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए अवैध गतिविधियों के परिणामस्वरूप लिया गया है।”
आयोग ने कहा कि न तो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 और न ही कोई और कानून मतदान की तिथि तय करने के लिए राज्य सरकार से परामर्श लेने की बात कहता है।
निर्वाचन आयोग ने यह भी कहा कि राज्यपाल ने चिंता जताई है कि दोनों विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव स्थगित करने से इन दोनों सीटों के विधायक आगामी राज्यसभा चुनाव में मतदान करने से वंचित रह जाएंगे।
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