भोपाल, 28 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में सोशल मीडिया पर अपने दिल की बात लिखना दो भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अफसरों को महंगा पड़ गया। एक को जिलाधिकारी के पद से हटा दिया गया है तो दूसरे से नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। एक अफसर ने जवाहरलाल नेहरू की प्रशंसा की थी तो दूसरे ने जयललिता को बधाई दी थी। इन दोनों अफसरों के समर्थन में राजनीतिक दल भी आगे आने लगे हैं। इतना ही नहीं इस कार्रवाई को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलने की कोशिश करार दिया गया है।
राज्य के बड़वानी जिले के जिलाधिकारी अजय सिंह गंगवार ने अपनी फेसबुक वॉल पर जवाहर लाल नेहरू और गांधी परिवार की प्रशंसा की थी, उनकी नीतियों को सराहा था, इस पर सरकार ने उन्हें बड़वानी से हटा दिया है। राज्य सरकार ने गंगवार की पोस्ट को सेवा शर्तो के खिलाफ माना है।
राज्य सरकार की इस कार्रवाई पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता के. के. मिश्रा ने कहा है कि सरकार को यह बताना चाहिए कि गंगवार ने जो पोस्ट किया है वह किस सर्विस रूल के खिलाफ आता है।
पिछले दिनों बड़वानी के जिलाधिकारी गंगवार ने अपने फेसबुक एकाउंट के पेज पर जवाहर लाल नेहरू और गांधी परिवार की प्रशंसा की थी। उन्होंने पोस्ट किया था, “जरा गलतियां बता दीजिए जो नेहरू को नहीं करनी चाहिए थी, तो अच्छा होता। यदि उन्होंने 1947 में हिन्दू तालीबानी राष्ट्र बनने से रोका, तो क्या यह उनकी गलती थी। उन्होंने आईआईटी, इसरो, बीएआरएसी, आईआईएसबी, आईआईएम, भेल स्टील प्लांट, बड़े बांध और पॉवर लगाए, यह उनकी गलती थी। आसाराम और रामदेव जैसे ‘इंटलेक्च ुअल’ की जगह विक्रम साराभाई और होमी जहांगीर भाभा को सम्मान दिया, यह उनकी गलती थी।”
उन्होंने आगे लिखा, “देश में गोशाला की जगह विश्वविद्यालय खोले, यह उनकी गलती थी। उन्होंने आपको अंधविश्वास की जगह वैज्ञानिक रास्ता दिखाया, यह उनकी गलती थी। इन सब गलतियों के लिए गांधी फैमिली को देश से माफी तो बनती है।”
एक तरफ जहां बड़वानी के जिलाधिकारी गंगवार को पद से हटा दिया गया है वहीं नरसिंहपुर जिलाधिकारी सी. बी. चक्रवर्ती को सिर्फ इसलिए नोटिस दिया गया है, क्योंकि उन्होंने ट्विटर पर तामिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता को बधाई दी थी।
जनता दल यूनाइटेड के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद यादव ने राज्य सरकार को तालिबान प्रवृत्ति की सरकार करार दिया है। उनका कहना है कि यह सरकार नेहरू, लोहिया, जयप्रकाश के विचारों व नीतियों की प्रशंसा करने वालों की नहीं बल्कि गोडसे की सराहना करने वालों को पसंद करती है। यही कारण है कि संविधान में प्रदत्त अभिव्यक्ति के अधिकार पर कुठाराघात करते हुए एक कलेक्टर को पद से हटा दिया गया है तो दूसरे को नोटिस दिया गया है।
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