तमिलों को उम्मीद, खत्म नहीं होगा जलिकट्टू

वेंकटाचारी जगन्नाथन

वेंकटाचारी जगन्नाथन

चेन्नई, 14 जनवरी (आईएएनएस)। जलिकट्टू पर रोक लगाने के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से हतप्रभ तमिलनाडु के कई लोग यह प्रार्थना कर रहे हैं कि सांड़ों पर काबू पाने का प्राचीन खेल खत्म न हो जाए।

सर्वोच्च न्यायालय ने पशु क्रूरता के आधार पर बुधवार को जलिकट्टू पर रोक लगा दी थी। यह रोक पोंगल पर्व शुरू होने से ठीक पहले लगाई गई। इस पर्व के दौरान राज्य के ग्रामीण इलाकों में जलिकट्टू का आयोजन पारंपरिक रूप से होता रहा है।

वकील और जलिकट्टू सांड़ों के मालिक आई.टी.सीमन ने आईएएनएस से कहा, “हम उम्मीद कर रहे हैं कि जलिकट्टू को भी पुरानी चीज बताकर किनारे नहीं लगा दिया जाएगा। यह खेल तमिल ग्रामीण जीवन का हिस्सा है। कई परिवार पशु व्यापार के जरिए इसी से अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं।”

जलिकट्टू के प्रशंसकों का कहना है कि सभी लोग चाहते हैं कि सदियों पुरानी इस परंपरा के मिट जाने के बजाए इससे जुड़े सुरक्षा उपायों का पालन किया जाए।

मदुरई जिले में एक गांव ऐसा है जहां जलिकट्टू के न होने की वजह से शोक जैसा माहौल है। आलंगानाल्लुर नाम के इस गांव के मेकेनिकल इंजीनियर और फलों के निर्यातक के.महेश ने कहा, “पूरा गांव शोक मना रहा है।”

जलिकट्टू के प्रशंसकों का कहना है कि पशु प्रेमियों की याचिका पर अदालत का फैसला टब के पानी के साथ बच्चे को भी फेंक देने जैसा है।

कई लोग पूछ रहे हैं कि क्या देश में मनाए जाने वाले दिवाली के पर्व को इस आधार पर कभी भी रोका जाएगा कि इसके पटाखों से वायु प्रदूषण होता है?

पूर्व नौकरशाह एम.मुरुगन ने कहा, “हमें समस्या का समाधान करना चाहिए, न कि खेल को ही खत्म कर देना चाहिए। यह पूरी तरह संभव है कि जलिकट्टू में कमियां रही होंगी। गलतियों को ठीक करें। जलिकट्टू पर रोक क्यों?”

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