हैदराबाद, 6 अगस्त (आईएएनएस)। तेलंगाना ने जल संसाधनों की निगरानी के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करने वाला पहला भारतीय राज्य बनने की दिशा में शनिवार को इसरो के साथ एक करार पर हस्ताक्षर किए।
सिंचाई विभाग ने तेलंगाना जल संसाधन सूचना प्रणाली (टीडब्ल्यूआरआईएस) विकसित करने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के राष्ट्रीय दूरसंवेदी केंद्र (एनआरएससी) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
तेलंगाना के सिंचाई मंत्री हरीश राव और इसरो के अध्यक्ष किरण कुमार की उपस्थिति में एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
यह इसरो के जियो मंच ‘भुवन’ पर ऑनलाइन होगा और इसके जरिए हर बांध, बैराज, मुख्य नहर और अन्य संसाधनों की तस्वीरें ली जा सकेंगी।
किरण कुमार ने कहा कि वह बेहद खुश हैं कि तेलंगाना डाटा प्रणाली का सक्रिय उपयोगकर्ता बनने जा रहा है। उन्होंने कहा कि डाटा केवल इसरो के अपने उपग्रह से ही नहीं, बल्कि अन्य समन्वयक अंतरिक्ष एजेंसियों के जरिए भी उपलब्ध है।
हरीश राव ने कहा कि प्रणाली राज्य के सभी जल स्रोतों की गहराई और मात्रा की निगरानी के लिए गूगल मैप्स से भी तेजी से काम करेगी।
प्रणाली के तहत हर 15 दिन में डाटा अपलोड किया जाएगा और प्रमुख इंजीनियर से लेकर क्षेत्रीय इंजीनियर तक सभी के पास जानकारी होगी।
मंत्री ने कहा कि डाटा से राज्य में हर परियोजना और फसल पद्धति के तहत सिंचित क्षेत्र की सटीकता से जानकारी मिलेगी।
उन्होंने उम्मीद जताई कि इस प्रणाली से विभाग की कार्यक्षमता के सुधार में मदद मिलेगी और डाटा हर व्यक्ति की पहुंच में होगा, जिससे पारदर्शिता आएगी।
प्रणाली से ककतिया मिशन के प्रभाव के आकलन में भी मदद मिलेगी, जिसके तहत 45,000 सिंचाई टैंकों को बहाल किया जा रहा है।
हरीश राव ने कहा कि डाटा नई सिंचाई परियोजनाओं के सर्वेक्षण, डिजाइन और क्रियान्वन के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।
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