अगरतला, 19 नवंबर (आईएएनएस)। त्रिपुरा की दो विधानसभा सीटों के लिए शनिवार को हुए उपचुनाव में कुल 78,400 मतदाताओं में से 90 फीसदी से ज्यादा मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।
त्रिपुरा के अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी देबाशीष मोदक ने शाम चार बजे मतदान खत्म होने के तुरंत बाद आईएएनएस से कहा, “दोनों विधानसभा क्षेत्रों में 90 फीसदी से अधिक मतदाताओं ने मतदान किया। मतदान शांतिपूर्वक संपन्न हुआ और दोनों विधानसभा क्षेत्रों से एक भी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।”
त्रिपुरा की अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित बरजाला और खोवाई सीटों के लिए उपचुनाव हुआ। मतगणना 22 नवंबर को होगी।
पुलिस प्रवक्ता उत्तम भौमिक ने आईएएनएस को बताया, “दोनों विधानसभा सीटों में कहीं भी किसी अप्रिय घटना की खबर नहीं मिली है।”
उन्होंने कहा, “खोवाई निर्वाचन क्षेत्र के सिंगीचारा में एक मतदान केंद्र के निकट विस्फोटकों से भरा एक लावारिस बैग पाया गया। लोगों के बीच आतंक न फैले, इसके लिए सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी। विस्फोटकों को निष्क्रिय करने के लिए वहां बम निरोधक दस्ता पहुंचा।”
भौमिक के मुताबिक, दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में कुछ इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में तकनीकी खराबी आई, जिसके कारण मतदान कुछ समय के लिए रोक दिया गया, लेकिन समस्या का समाधान होने के बाद मतदान फिर से चालू कर दिया गया।
त्रिपुरा पुलिस महानिदेशक के. नागराज ने आईएएनएस को बताया, “दोनों विधानसभा सीटों पर शांतिपूर्ण और सुचारु ढंग से उपचुनाव के लिए सुरक्षा के भारी इंतजाम किए गए। केंद्रीय अर्धसैनिक बल – सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की नौ कंपनियों को चुनावी विधानसभा क्षेत्रों और उनके आसपास के इलाकों में तैनात किया गया था।”
पुलिस प्रमुख ने कहा, “केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के अलावा, आतंकवाद रोधी प्रशिक्षित टीएसआर (त्रिपुरा स्टेट राइफल्स) सहित राज्य बलों को भी पर्याप्त संख्या में बरजाला और खोवाई विधानसभा क्षेत्रों के आसपास के इलाकों में तैनात किया गया।”
पार्टी में भीतरी फूट के चलते छह जून को कांग्रेस विधायक जितेंद्र सरकार के इस्तीफे के बाद बरजाला सीट और मार्क्सवादी कमुयनिस्ट पार्टी (माकपा) विधायक समीर देव सरकार के निधन के बाद खोवाई विधानसभा सीट रिक्त हो गई थी।
दोनों विधानसभा सीटों पर पांच-पांच उम्मीदवार मैदान में थे।
दोनों जगहों पर हुए उपचुनाव में सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेतृत्व वाले वाम मोर्चा, विपक्षी तृणमूल कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तथा कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला है।
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