अगरतला, 14 सितम्बर (आईएएनएस)। वाम शासित त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव से 17 महीने पहले राजनीतिक पार्टियां खास तौर पर जनजातीय आधारित पार्टियों ने पृथक राज्य सहित अपनी मांगों को आगे बढ़ाने के लिए अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।
केंद्र सरकार के समक्ष अपनी मांगों को प्रेषित करने के लिए जनजातीय आधारित दो पार्टियां -इंडीजीनस नेशनलिस्ट पार्टी ऑफ त्रिपुरा (आईएनपीटी) और इंडीजीनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) दिल्ली चलो अभियान का आयोजन करेंगी।
आईपीएफटी के अध्यक्ष नरेंद्र चंद्र देबबर्मा ने बुधवार को कहा, “आईपीएफटी की पांच सदस्यीय टीम गुरुवार को यहां से दिल्ली के लिए प्रस्थान करेगी, जो दीर्घकाल से लंबित अपनी मांगों को आगे बढ़ाने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल उरांव और अन्य लोगों से मुलाकात करेगी।”
उन्होंने कहा, “वह गत 23 अगस्त को अगरतला में हुई घटना से केंद्रीय गृहमंत्री को अवगत कराएंगे। त्रिपुरा में जनजाति समुदाय के लोग वंचित हैं। उन्हें और सशक्त करने की जरूरत है।”
आईपीएफटी के कार्यकारी महासचिव मइबार कुमार जमतिया दिल्ली अभियान का नेतृत्व करेंगे और केंद्रीय मंत्रियों को उनकी मांगों से युक्त एक ज्ञापन सौंपेंगे।
पृथक राज्य की मांग के समर्थक आईपीएफटी कार्यकर्ताओं की रैली के बाद गत 23 अगस्त को अगरतला में हुई जातीय हिंसा में पांच पुलिसकर्मियों समेत 24 लोग घायल हुए थे और 17 वाहन बुरी तरह क्षतिग्रसत हो गए थे।
आईपीएफटी और आईएनपीटी त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (टीटीएएडीसी) को अधिक शक्ति देने, जनजातीय भाषा कोकबोरोक को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने और 60 सदस्यीय विधानसभा में जनजाति के लिए 50 प्रतिशत सीट आरक्षित करने की मांग कर रहे हैं।
आईपीएफटी त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद को क्रमोन्नत कर पृथक राज्य के गठन की मांग को लेकर आन्दोलन कर रहा है। त्रिपुरा के 10,291 वर्ग किलोमीटर का इलाका टीटीएएडीसी के सीमा क्षेत्र में आता है, जो राज्य के कुल क्षेत्रफल का दो-तिहाई भाग है।
उधर, आईएनपीटी पृथक राज्य के गठन का विरोध करती है, लेकिन वह भी अपनी मांगों के समर्थन में दिल्ली में छह घंटे के विरोध प्रदर्शन का आयोजन करेगी और दिसंबर महीने के पहले सप्ताह में उनके प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात करेंगे।
आईएनपीटी के प्रवक्ता स्रोता रंजन खिसा ने कहा, “हमारे नई दिल्ली अभियान के दौरान हम अपनी मांगों पर प्रकाश डालेंगे। हमने यह फैसला मंगलवार को अपनी केंद्रीय कार्यकारिणी समिति की बैठक में किया है।”
उन्होंने कहा कि आईएनपीटी अपनी मांगों के समर्थन में राज्य भर में अगले दो महीने में बड़े पैमाने पर अभियान चलाएगी।
60 सदस्यीय त्रिपुरा विधानसभा में 20 सीटें जनजातियों के लिए आरक्षित हैं, इसलिए राज्य की राजनीति में जनजातीय पार्टियों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
राजनीतिक विश्लेषक तापस डे ने कहा कि सत्ताधारी माकपा समेत सभी राजनीतिक पार्टियां आईपीएफटी की पृथक राज्य के गठन की मांग का विरोध करती हैं। जनजातियों के बीच इस जनजातीय पार्टी का आधार मजबूत हुआ है और वह पृथक राज्य की मांग की अगुवाई कर रही है।
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