अगरतला, 16 मई (आईएएनएस)। त्रिपुरा के कंचनपुर इलाके में एक दिन पहले मिजोरम के आक्रोशित जनजातीय शरणार्थियों द्वारा स्थानीय लोगों के करीब 22 घरों को फूंकने और नुकसान पहुंचाने की घटना के बाद सोमवार को क्षेत्र में तनाव बढ़ गया।
त्रिपुरा की सरकार ने उस जातीय हंगामे के बारे में केंद्रीय गृह मंत्रालय को एक रिपोर्ट भेज दी है, जिसके चलते करीब 100 स्थानीय लोग सुरक्षित जगहों पर शरण लेने को मजबूर हो गए हैं।
उत्तर त्रिपुरा जिले के पुलिस प्रमुख माणिक लाल दास ने आईएएनएस को बताया, “त्रिपुरा स्टेट राइफल्स (टीएसआर) की एक बहुत बड़ी टुकड़ी को प्रभावित इलाकों में तैनात किया गया है। हालात अब पूरी तरह नियंत्रण में है, हालांकि इलाकों में कुछ तनाव बढ़ रहा है।”
माणिक ने कहा कि स्थानीय प्रशासन प्रभावित लोगों को हर तरह की सहायता व आर्थिक मदद उपलब्ध कराएगा।
रियांग जनजाति के बहरीगुरम रियांग (36) ने रविवार को आत्महत्या कर ली। आरोप है कि बहरीगुरम के साथ स्थानीय लोगों ने मारपीट की थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वह पोखर के मालिक से इजाजत लिए बिना पोखर से मछलियां पकड़ रहा था। उससे मारपीट व उसकी आत्महत्या से बौखलाए रियांग जनजाति के करीब 100 शरणार्थियों ने रविवार दोपहर कुछ स्थानीय लोगों के घरों को आग के हवाले कर दिया।
झड़पों में सात पुलिसकर्मी और कुछ अग्निशमन कर्मी घायल हो गए।
रियांग जनजाति के लोगों को स्थानीय लोग ‘ब्रू’ पुकारते हैं। इस जनजाति के करीब 31,000 लोग 19 साल पहले मिजोरम में हुए जातीय संघर्ष के बाद त्रिपुरा आ गए थे और तभी से उत्तरी त्रिपुरा में सात अस्थायी शिविरों में रह रहे हैं।
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