नई दिल्ली, 13 नवंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय राजधानी के कला प्रेमियों को देश के पूर्वी क्षेत्र से 20वीं सदी के जाने-माने कलाकार गोपाल घोष की उत्कृष्ट 58 कलाकृतियों का दुर्लभ अवलोकन करने का मौका मिलेगा। कुमार गैलरी में शनिवार से पश्चिम बंगाल के प्रमुख कला विशेषज्ञ गोपाल घोष की 17 दिवसीय प्रदर्शनी आयोजित की जा रही है।
इस प्रदर्शनी को विद्वान एवं स्तंभकार उमा नायर ने क्यूरेट किया है। ‘रस्टिक रेजोनेंस’ नामक इस प्रदर्शनी में कोलकाता में जन्मे इस कलाकार की 58 कृतियों को प्रदर्शित किया जाएगा।
गोपाल घोष को कला के प्रति उनके आधुनिकतावादी दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। उन्होंने मूर्तिकार और वास्तुकार के अलावा वास्तुकला के प्रशिक्षक के रूप में भी ख्याति अर्जित की। साथ ही उन्होंने कला के अलावा डिजाइन के क्षेत्र में भी अपना स्थान बनाया।
यह प्रदर्शनी नई दिल्ली में सुंदर नगर स्थित गैलरी में आयोजित हो रही है। प्रदर्शनी गैलरी के 60 साल पूरे होने के सिलसिले में तथा गोपाल घोष के निधन के 35 साल बाद आयोजित हो रही है। गौरतलब है कि गोपाल घोष के साथ कुमार परिवार का 1950 से ही पारिवारिक एवं पेशेगत रिश्ता रहा है।
14 से 30 नवम्बर तक चलने वाली यह प्रदर्शनी 1913 में जन्मे गोपाल घोष की उन कलाकृतियों पर केन्द्रित है, जिन्हें उन्होंने 1950 के आरंभ से लेकर दो दशक के दौरान सृजित किया। कला समीक्षकों के अनुसार इस अवधि के दौरान गोपाल घोष की सृजनात्मकता चरम पर थी।
इस प्रदर्शनी के शीर्षक के अनुरूप ही इस कला प्रदर्शनी में घोष की उन कृतियों को ही मुख्य रूप से प्रदर्षित किया गया है जो प्रकृति खास तौर पर ग्रामीण परिवेश पर आधारित हैं।
देश के दक्षिणी स्थलों के प्रति विशेष आकर्षण रखने वाले घुमंतू कलाकार, गोपाल घोष बंगाल स्कूल से काफी प्रेरित थे। बाद में उन्होंने यूरोपीय अभिव्यक्ति वादियों और प्रभाववादियों द्वारा विकसित सचित्र शब्दावली तैयार की। इसके अलावा, उन्होंने चीनी गुरुओं और परिदृश्य और अलंकारिक चित्र के प्रति उनके दृष्टिकोण के प्रति आकर्षण को बरकरार रखा।
आधुनिकतावादी गुरु की अपनी पहली एकल प्रदर्शनी आयोजित करने वाली मेजबान गैलरी के विनीत कुमार ने कहा कि घोष की कुछ कृतियां काफी सरल लग सकती हैं। उन्होंने कहा, “हमने इस बात का पूरा ध्यान रखा है कि पेंटिग्स को रंगबिरंगे तसर सिल्क के बार्डर में फ्रेम किया जाए ताकि उसकी सुदंरता में चार चांद लग जाए।”
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