दिल्ली में जुटेंगे 15 भाषाओं के 45 कवि

नई दिल्ली, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। रजा फाउंडेशन की ओर से कविता और काव्य विचार पर आधारित तीन दिवसीय द्वैवार्षिकी सम्मेलन शुक्रवार से शुरू होगा, जिसमें देशभर के 15 भारतीय भाषाओं के 45 कवियों का समागम होगा। सम्मेलन में कविता पाठ के संग कविताओं पर चर्चा भी होगी।

यह आयोजन प्रख्यात चित्रकार सैयद हैदर रजा द्वारा 2001 में स्थापित रजा फाउंडेशन के संचालक प्रसिद्ध हिंदी कवि और कलाप्रेमी अशोक वाजपेयी की देखरेख में होने जा रहा है। ‘वाक् : भारतीय कविता की रजा द्वैवार्षिकी’ नामक इस सम्मेलन में 11 से अधिक कविता सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके तहत, त्रिवेणी कला संगम में प्रत्येक आमंत्रित कवि को दर्शकों के सामने अपनी चुनी हुई कविताओं का पाठ करने के लिए 15 मिनट का वक्त दिया जाएगा। इनमें मूल कविताओं के साथ-साथ हिंदी और अंग्रेजी में अनुवाद भी शामिल होंगे।

अशोक वाजपेयी ने कहा, “हम दिल्ली की जनता का ध्यान इस ओर खींचना चाहते हैं कि कविता का जादू न सिर्फ हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू में बरकरार है, बल्कि कश्मीरी, असमिया और मणिपुरी जैसी भाषाओं में भी इसके उतने ही कद्रदान हैं।”

उन्होंने कहा, “उद्घाटन समारोह के लिए हम जाने-माने कवियों और ऐसे उभरते कवियों को भी आमंत्रित कर रहे हैं, जिनकी दिग्गज कवियों ने सराहना की है।”

शुक्रवार की शाम आयोजित होने वाले पहले सत्र में भाग लेने वाले कवियों में सलमा (तमिल), हर प्रसाद दास (ओड़िया), नीलिम कुमार (असमिया), रतन थियम (मणिपुरी) और मजरूह रशीद (कश्मीरी) शामिल हैं।

इस मौके पर 45 कवियों की रचनाओं संकलन ‘वाक्’ का लोकार्पण भी होगा।

कविता पाठ से पहले, प्रख्यात हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक भुवनेश कोमकली अपने दादा पंडित कुमार गंधर्व और पिता पंडित मुकुल शिवपुत्र की अनोखी शैली से प्रेरित कबीर, तुलसीदास, सूरदास और मीरा के पदों का गायन करंेगे।

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