नई दिल्ली, 30 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली में समान जल वितरण के लिए जल-नियंत्रित वॉल्व के साथ पहली स्काडा प्रणाली शुरू की गई है। पीतमपुरा पायलट प्रोजेक्ट एरिया में सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्विजिशन (स्काडा) सिस्टम का उद्घाटन बुधवार को किया गया।
दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) और जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) ने ‘द असिस्टेंस रिलेटेड टू देल्ही वॉटर सप्लाई इंप्रूवमेंट प्रोजेक्ट’ पर संगोष्ठी का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य जलापूर्ति प्रबंधन विषय पर अनुभवों एवं ज्ञान का आदान-प्रदान करना था।
यहां जारी एक बयान के अनुसार, इस पायलट प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य स्काडा प्रणाली द्वारा जल के समान वितरण के लिए चयनित डिस्ट्रिक्ट मीटर्ड एरिया (डीएमए) में पानी के बहाव और दबाव की निगरानी और नियंत्रण करना था। यह देश की पहली स्काडा प्रणाली है, जिसकी मदद से 13 लोकल कंट्रोल पॉइंट पर जल नियंत्रित वॉल्व की मदद से जल वितरण की निगरानी और उस पर नियंत्रण रखा जाएगा। यह डीजेबी को दिल्ली में समान जल वितरण और एनआरडब्ल्यू प्रबंधन की शुरुआत करने में मदद करेगा।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में नॉन-रेवेन्यू वाटर (एनआरडब्ल्यू) की दर काफी ऊंची है। दिल्ली में यह 40 से 50 प्रशित के बीच है। पीने के पानी के कुशल उपयोग के लिए एनआरडब्ल्यू में कमी लाना एक प्रमुख चुनौती है। 2021 में दिल्ली के लिए पानी की आपूर्ति के मास्टर प्लान की तैयारी के बाद, जेआईसीए ने 28,97.5 करोड़ जेपीवाई (लगभग 1700 करोड़ रुपये) का आधिकारिक विकास सहायता (ओडीए) ऋण प्रदान किया है। यह ऋण ‘दिल्ली जल आपूर्ति सुधार परियोजना’ के लिए दिया गया है। इसकी मदद से चंद्रावल जल शोधन संयंत्र की मरम्मत और सुधार का काम किया जाएगा।
जेआईसीए पिछले चार साल से टेक्निकल कोऑपरेशन प्रोजेक्ट का संचालन कर रहा है, जिसका उद्देश्य डीजेबी के अधिकारियों की प्रबंधन क्षमता और कुशलता में सुधार लाना और पायलट प्रोजेक्ट का कार्यान्वयन करना है।
इस मौके जेआईसीए के भारत कार्यालय के प्रतिनिधि ताकेमा साकामोतो ने कहा, “दिल्ली में पानी की बेहद कमी है, वहीं 40 से 50 प्रतिशत पानी का कोई हिसाब-किताब ही नहीं है। यह एक तरह की बर्बादी है। स्काडा वितरण परियोजना के साथ, जेआईसीए को डीजेबी की जल प्रबंधन दक्षता को तर्कसंगत बनाने और इसे अतिरिक्त बढ़ाने की उम्मीद है।”
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