दुष्कर्म पीड़िता की पहचान हर स्तर पर गुप्त रखी जाए : सर्वोच्च न्यायालय

नई दिल्ली, 11 दिसम्बर (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि दुष्कर्म पीड़िता की पहचान का खुलासा सुनवाई सहित मामले के सभी चरणों पर नहीं किया जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर, न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि ऐसे मामलों से संबंधित सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (सीएफएसएल) रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज बिना पीड़िता की पहचान का खुलासा किया एक सीलबंद लिफाफे में निचली अदालत को सौंपे जाने चाहिए।

पीठ की तरफ से न्यायमूर्ति गुप्ता ने ‘मीडिया को टीआरपी को बढ़ाने के मकसद के लिए दुष्कर्म मामलों को सनसनीखेज बनाने’ से बचने की सलाह दी और आदेश किया कि नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता की पहचान का खुलासा उनके परिवारों द्वारा भी नहीं किया जा सकता।

अदालत का यह फैसला वकील निपुण सक्सेना द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर आया है, जिन्होंने सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए कदम उठाने की मांग करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

यह याचिका 16 दिसंबर 2012 दिल्ली सामूहिक दुष्कर्म मामले के बाद दाखिल की गई थी।

फैसले में कहा गया, “मीडिया का यह केवल अधिकार ही नहीं बल्कि कर्तव्य भी है कि वह यौन उत्पीड़न के मामलों को रिपोर्ट करे लेकिन उसे पीड़िता के साक्षात्कार से बचना चाहिए।”

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