चेन्नई, 27 फरवरी (आईएएनएस)। एआईएडीएमके (ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) के पूर्व सांसद के.सी. पलनीस्वामी ने सोमवार को निर्वाचन आयोग से आग्रह किया कि वह वी.के. शशिकला को पार्टी महासचिव के तौर पर अयोग्य करार दे। उन्होंने इसके पीछे एक दोषी व्यक्ति के वोट देने के अधिकार को रोकने वाले कानूनी प्रावधानों का हवाला दिया है।
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एस. कृष्णमूर्ति ने आईएएनएस से कहा कि कानून में दोषियों को पार्टी पद पर रहने से रोकने के लिए कानून होने चाहिए।
एआईएडीएमके के सदस्य और पूर्व सांसद पलनीस्वामी ने आईएएनएस से कहा, “जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 62 (5) में साफ तौर पर एक दोषी के भारत में किसी चुनाव में मतदान पर रोक है। मतदान का अधिकार भारतीय लोकतंत्र का मौलिक अधिकार है।”
पलनीस्वामी ने कहा कि कानून में साफ है कि एक दोषी को मतदान का अधिकार नहीं है।
पलनीस्वामी ने कहा, “एक व्यक्ति, जिसका बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार रद्द कर दिया गया है, उसे एक राजनीतिक पार्टी के नेता के तौर पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।”
उन्होंने कहा कि एआईएडीएमके की अंतरिम महासचिव शशिकला को भ्रष्टाचार के एक मामले में चार साल के लिए दोषी ठहराया गया है।
पलनीस्वामी ने कहा, “एआईएडीएमके में महासचिव ही पार्टी में उम्मीदवारों को अधिकृत करते हैं और उन्हें चुनाव लड़ने के लिए पार्टी चिन्ह आवंटित करते हैं। इसके अलावा महासचिव ही पार्टी विधायकों को विधानसभा या संसद में मतदान के लिए व्हिप जारी करता है।”
पलनीस्वामी ने तर्क दिया, “किस तरह से एक व्यक्ति जिसे कानूनी तौर पर एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया में (चुनाव में वोट करने से) भाग लेने से रोका गया है, अप्रत्यक्ष रूप से एक राजनीतिक दल का प्रभार ले सकता है।”
इस पर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त कृष्णमूर्ति ने आईएएनएस से कहा, “लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 11ए और धारा 65 एक सजायाफ्ता व्यक्ति को संसद और राज्य विधानसभा चुनाव में मतदान से रोकते हैं, लेकिन ऐसे व्यक्तियों को एक राजनीतिक दल में पार्टी पद के अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता है।”
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