जबलपुर, 22 मार्च (आईएएनएस)। चिकित्सा महाविद्यालयों के एमबीबीएस पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाले नेशनल एलिजिविलिटी कम एंट्रेस टेस्ट (नीट) में निर्धारित अधिकतम आयु सीमा के आदेश को मध्य प्रदेश के जबलपुर उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश न्यायामूर्ति हेमंत गुप्ता व न्यायमूर्ति एस.के. गंगेले की युगलपीठ ने निरस्त कर दिया है। इस वर्ष अधिकतम आयु की बंदिश नहीं रहेगी।
याचिकाकर्ता दीपिका उपाध्याय की तरफ से दायर याचिका में कहा गया है कि नीट के लिए न्यूनतम आयु 17 वर्ष तथा अधिकतम आयु 25 वर्ष होना चाहिए। अधिकतम आयु के लिए जन्म तिथि आठ मई, 1992 तथा न्यूनतम आयु के लिए जन्म तिथि एक जनवरी, 2001 निर्धारित की गई है। नीट परीक्षा के लिए निर्धारित नियम एक बी में स्पष्ट उल्लेख है कि जिसकी उम्र 25 वर्ष से अधिक है, वह परीक्षा में शामिल नहीं हो सकता है, जो संविधान की धारा 14 व 19 का उल्लंघन है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता आदित्य संघी ने संवाददाताओं से कहा, “सुनवाई के दौरान न्यायालय को बताया गया कि पूर्व में एमबीबीएस पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए प्रदेश सरकार द्वारा पीएमटी परीक्षा आयोजित कराई जाती थी। पीएमपी परीक्षा में शमिल होने के लिए कोई आयु सीमा निर्धारित नहीं थी। इस वर्ष से एमबीबीएस पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए नीट परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है। आयु सीमा निर्धारित करने से वे विद्यार्थी प्रभावित होंेगे, जो विगत वर्षो से परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।”
याचिकाकर्ता छात्रा वर्ष 2015 से परीक्षा की तैयारी कर रही है। उसने उम्र निर्धारण के संबंध में पूर्व में कोई घोषणा किए बगैर इसी वर्ष से इसे अमल में लाने को असंवैधानिक करार देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।
एमसीआई की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रा नायर ने भी उम्र निर्धारण के नियम को गलत करार देते हुए युगलपीठ को बताया कि कमेटी ने उसे समाप्त करने के लिए गवर्निग काउंसिलिंग के पास भेजा है, जिसके बाद युगलपीठ ने इस वर्ष की नीट परीक्षा के लिए अधिकतम आयु सीमा के आदेश को निरस्त करने का आदेश जारी किया।
याचिका में केंद्र सरकार के स्वास्थ एव परिवार कल्याण विभाग, भारतीय चिकित्सा परिषद तथा नीट के सचिव को पक्षकार बनाया गया था।
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