कोलकाता, 17 जुलाई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल का पहाड़ी क्षेत्र दार्जिलिंग 19वीं सदी में नेपाली प्रकाशन उद्योग के उत्पत्ति के केंद्रो में से एक है। नेपाली प्रकाशन के तार कोलकाता और वाराणसी से भी जुड़े हैं।
मदन पुरस्कार पुस्तकालय (एमपीपी) के एक शोधकर्ता दीपक आर्यल ने कहा, “पहली नेपाली भाषा की किताब 1820 में कलकत्ता (अब कोलकाता) में प्रकाशित हुई और नेपाल में पहले प्रिंटिंग प्रेस के पहुंचने के साथ 1851 में छापाई काल की शुरुआत हुई।”
आर्यल ने यहां ब्रिटिश लाइब्रेरी व जादवपुर विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित संगोष्ठी में यह जानकारी साझा की।
आर्यल ने कहा कोलकाता, वाराणसी और दार्जिलिंग भारत में नेपाली प्रकाशन के प्रमुख केंद्र थे और वर्तमान में सिक्किम की एक प्रमुख भूमिका है।
यह पूछे जाने पर कि नेपाली भाषा आंदोलन को लेकर गोरखालैंड आंदोलन की शुरुआत हुई और क्या इससे किसी तरह की प्रकाशन गतिविधि बाधित हो सकती है, इस पर आर्यल ने आईएएनएस से कहा कि इस समय जारी आंदोलन से प्रकाशन क्षेत्र पर किसी तरह का असर नहीं पड़ने की संभावना है।
एमपीपी पुस्तकालय नेपाल के दो प्रतिष्ठित साहित्य पुरस्कार का प्रबंधन करता है। इसमें मदन पुरस्कार और जगदंबा श्री शामिल हैं।
नेपाली प्रकाशन उद्योग की उत्पत्ति का पता लगाते हुए आर्यल ने कहा कि 1820 से 1950 तक नेपाली भाषा में 1520 पुस्तकें प्रकाशित की गईं।
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