गाजियाबाद, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। यहां सोमवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की एक अदालत ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी राजीव कुमार को नोएडा भूखंड आवंटन घोटाले में न्यायिक हिरासत में डासना जेल भेज दिया।
पूर्व उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी (डीसीईओ) कुमार ने सोमवार को सीबीआई की एक अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। जिसके बाद अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में लेने के बाद जेल भेज दिया।
कुमार ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में केस हारने के बाद सोमवार को सीबीआई की अदालत में आत्मसमर्पण किया। वह उत्तर प्रदेश सरकार में कार्मिक विभाग में मुख्य सचिव (नियुक्ति) रह चुके हैं।
उनकी साथी और नोएडा की तात्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नीरा यादव सीबीआई की अदालत में पहले ही आत्मसमर्पण कर चुकी हैं। वह इस वक्त जेल में हैं। उन्हें 2012 में तीन साल के कारावास की सजा सुनाई गई थी।
नीरा उत्तर प्रदेश की मुख्य सचिव थीं। उन्हें व नोएडा के सीईओ सहित कुमार को सीबीआई की स्थानीय अदालत ने तीन-तीन साल की सजा सुनाई है। कुमार उस वक्त नोएडा के डीसीईओ थे।
उन पर 1994 में नोएडा में अपने कार्यकाल के दौरान अवैध भूखंड आवंटन के दो मामलों में एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
गाजियाबाद में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एस. लाल ने नोएडा भूखंड आवंटन घोटाले में फैसला सुनाते हुए कहा कि अदालत ने उन्हें अपने पद का दुरुपयोग करने का दोषी पाया है और इसलिए उन पर दो मामलों में 1,00,000 रुपये व 50,000 रुपये का जुर्माना लगाने के साथ ही तीन साल के कारावास की सजा सुनाई है।
इस मामले में नोएडा आन्ट्रप्रनर एसोसिएशन ने सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दाखिल की थी, जिसके बाद शीर्ष न्यायालय ने सीबीआई को मामले की जांच के आदेश दिए थे।
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