नोटबंदी से देश की जीडीपी 2 फीसदी घटेगी (लीड-1)

नई दिल्ली, 24 नवंबर (आईएएनएस)। देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नोटबंदी के क्रियान्वयन में ‘भारी कुप्रबंधन’ का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे जीडीपी दो फीसदी तक लुढ़क जाएगी। उन्होंने इसे ‘संगठित व वैधानिक लूट’ बताया।

देश के पूर्व वित्त मंत्री और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर रह चुके मनमोहन ने राज्यसभा में चर्चा के दौरान कहा, “सरकार के इस फैसले से देश की जीडीपी में लगभग दो फीसदी की गिरावट आएगी। यह आंकड़ा अनुमान से अधिक नहीं बल्कि कम है।”

मनमोहन ने अपने सात मिनट के संबोधन में कहा, “यह जो कुछ हुआ है उससे मुद्रा प्रणाली और बैंकिंग प्रणाली में लोगों का विश्वास कम हो सकता है।”

उन्होंने कहा, “यह सही नहीं है कि बैंकिंग प्रणाली में हर दिन नए नियम लागू हों। यह प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय के कार्यालय और आरबीआई के संदर्भ में बेहद असंतोषजनक नजर आता है।”

मनमोहन ने हैरानी जताई कि क्या सरकार नोटबंदी से लोगों को होने वाली कठिनाइयों और इससे छोटे कारोबारियों, आम आदमी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सचेत थी?

उन्होंने कहा कि 90 फीसदी कार्यबल अनौपचारिक क्षेत्र और 55 फीसदी कृषि क्षेत्र में है, जो कठिनाई के दौर से गुजर रहा है।

मनमोहन सिंह ने राज्यसभा में कहा, “मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछना चाहता हूं कि वह किसी ऐसे देश का नाम बताएं, जहां लोगों ने बैंक में अपने पैसा जमा कराए हैं लेकिन वे उसे निकाल नहीं सकते।”

सिंह ने कहा, “नोटबंदी के क्रियान्वयन में भारी कुप्रबंधन हुआ है और इसे लेकर देश में कोई दो राय नहीं है।”

उन्होंने कहा, “यह संगठित व वैधानिक लूट का मामला है। इसकी खामियां गिनाना मेरा मकसद नहीं है। मुझे उम्मीद है कि प्रधानमंत्री आखिर में ही सही इसका समाधान निकालेंगे।”

उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री इस समस्या से जूझ रहे लोगों को राहत पहुंचाने के लिए व्यावहारिक तरीके ढूंढने में मदद करेंगे। इस दौरान 60 से 65 लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा है।

उन्होंने कहा कि नोटबंदी से जो क्षेत्र अत्यधिक प्रभावित हुए हैं वे छोटे कारोबार, खेती और सहकारी बैंकिंग है। उन्होंने सरकार से लोगों की समस्याओं का समाधान करने की अपील की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील पर कि लोग केवल 50 दिनों तक परेशानी सहें, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जॉन मेनार्ड केन्स को उद्धृत करते हुए कहा, “जो नोटबंदी को दीर्घकालिक हित में बता रहे हैं, उन्हें इस कथन को याद रखना चाहिए कि ‘भविष्य में तो हम सभी मर जाएंगे’।”

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