‘पद्मावती’ विरोध : चित्तौड़गढ़ किले में प्रवेश बंद, मुंबई पुलिस ने चेतावनी जारी की (राउंडअप)

जयपुर, 17 नवंबर (आईएएनएस)। फिल्मकार संजय लीला भंसाली की आगामी फिल्म ‘पद्मावती’ के विरोध में शुक्रवार को राजस्थान के प्रसिद्ध चित्तौड़गढ़ किले में प्रवेश बंद कर दिया गया।

मुंबई पुलिस ने फिल्म के विरोध के दौरान कानून को अपने हाथों में लेने वाले संगठनों और लोगों के खिलाफ चेतावनी भी जारी की है।

विरोध के संकेत के रूप में सर्व समाज विरोध समिति ने सुबह 10 बजे पदन पोल गेट के नाम से मशहूर गेट को बंद करके चित्तौड़गढ़ किले के प्रवेश बिंदु को बाधित कर दिया।

सर्व समाज विरोध समिति के रणजीत सिंह ने आईएएनएस को बताया, “हम किसी को भी किले के अंदर जाने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। यह एक शांतिपूर्ण विरोध है।”

यहां अक्टूबर से शुरू होने वाले पर्यटन सत्र में लगभग 3,000 से 4,000 से अधिक लोग किले का दौरा करते हैं। पुलिस ने कहा कि किले में धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों की संख्या 250 से ज्यादा नहीं है।

प्रदर्शनकारियों की मांग है कि फिल्म ‘पद्मावती’ रिलीज न हो, क्योंकि इसमें विकृत ऐतिहासिक तथ्यों को दिखाया गया है।

यह फिल्म चित्तौड़गढ़ की रानी पद्मिनी या पद्मावती के जीवन पर आधारित है।

फिल्म की रिलीज पर बढ़ते विरोध को देखकर मुंबई पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को किसी प्रकार की अप्रिय घटना को अंजाम न देने की चेतावनी दी है।

संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) देवेन भारती ने एक बयान में कहा, “कोई भी व्यक्ति और संगठन अगर हिंसक होगा तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कारवाई की जाएगी। हम सभी को व्यक्तिगत रूप से या सामूहिक रूप से सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और ऐसे लोगों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त उपाय किए गए हैं, जिन्हें धमकी मिली है।”

भारती ने कहा कि यह नीति उन प्रदर्शनों पर नहीं लागू होगी, जो लोकतांत्रिक तरीके से किए जाएंगे।

भारती ने उन लोगों को भी आश्वासन दिया, जिन्हें धमकियां दी गई हैं। उन्होंने कहा, “हम संभ्रांतवादी को किसी प्रकार की समस्या पैदा करने की अनुमति नहीं देंगे और लोग बिना किसी डर के अपनी नियमित गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं।”

‘पद्मावती’ को कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है और फिल्म के निर्माताओं और कलाकारों को प्रदर्शनकारी संगठनों ने शारीरिक नुकसान पहुंचाने की भी धमकी दी है। उनका कहना है कि वे राजपूत इतिहास की विकृतियों को नहीं दिखाने देंगे। सत्तारूढ़ भाजपा ने भी कहा है कि फिल्म निर्माताओं को ऐतिहासिक तथ्यों को विकृत नहीं करना चाहिए। अधिकांश विरोध प्रदर्शन राजस्थान में हुए है, लेकिन कुछ मुंबई में भी हुए हैं।

यह फिल्म एक दिसंबर को रिलीज होगी। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड को अभी भी फिल्म की स्क्रीनिंग के लिए मंजूरी देनी है।

इस सप्ताह की शुरुआत में दीपिका ने आईएएनएस से कहा था, “हम केवल सेंसर बोर्ड के प्रति उत्तरदायी हैं और मैं जानती हूं और मेरा मानना है कोई भी चीज इस फिल्म की रिलीज को नहीं रोक सकती।”

फिल्म शायद स्थगित हो सकती है, लेकिन निर्माताओं द्वारा आधिकारिक बयान अभी जारी नहीं किया गया है।

अपनी फिल्म के खिलाफ व्यापक आलोचना के बाद, भंसाली ने इस मुद्दे पर कहा है कि यह फिल्म राजपूतों का सम्मान करती है और यह फिल्म ऐसी किसी भी चीज को नहीं दशार्ती, जो राजपूतों की भावनाओं को चोट पहुंचाए।

लेकिन प्रदर्शनकारियों ने विरोध प्रदर्शन को समाप्त करने से इंकार कर दिया है।

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