नई दिल्ली, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। पहला विश्व सुनामी जागरूकता दिवस यहां पांच नवंबर को मनाया जाएगा। इस आयोजन के जरिए सुनामी के खतरों से संबंधित मामलों में विश्व भर में लोगों के बीच जागरूकता का प्रसार होगा और विनाशकारी प्राकृतिक आपदा से अक्सर होने वाले नुकसान को कम करने में प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के महत्व पर जोर दिया जाएगा।
यहां जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, पहला विश्व सुनामी जागरूकता दिवस का स्मरण करने के लिए आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डीआरआर) चैम्पियन्स के साथ आपदा जोखिम न्यूनीकरण हेतु एशियाई मंत्री स्तरीय सम्मेलन (एएमसीडीआरआर) 2016 में एक समारोह आयोजित किया जाएगा।
बयान के अनुसार, सम्मेलन का आयोजन भारत सरकार द्वारा तीन से पांच नवंबर तक नई दिल्ली के विज्ञान भवन में संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यालय (यूएनआईएसडीआर) के सहयोग से किया जाएगा।
बयान में कहा गया है कि सम्मेलन के दौरान विषयगत समारोहों, प्रदर्शनियों एवं जागरूकता सामग्रियों के वितरण के जरिए जागरूकता बढ़ाने वाले कार्यकलाप आयोजित किए जाएंगे। 2004 में हिंद महासागर में आई विनाशकारी सुनामी के बाद भारत सरकार ने हैदराबाद में भारतीय राष्ट्रीय समुद्र सूचना सेवा केन्द्र (आईएनसीओआईएस) के तहत एक भारतीय सुनामी प्रारंभिक चेतावनी केन्द्र (आईटीईडब्ल्यूसी) की स्थापना की।
बयान के अनुसार, भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र के अन्य 23 देशों के साथ मिलकर सात-आठ सितंबर, 2016 को एक सुनामी मॉक ड्रिल में भाग लिया। जागरूकता बढ़ाने के अतिरिक्त, इस ड्रिल ने सुनामी एवं इसी प्रकार की अन्य आपात स्थितियों से निपटने में सहभागी देशों की तैयारियों की भी समीक्षा की।
उल्लेखनीय है कि सुनामी जागरूकता के लिए पांच नवंबर का महत्व वर्ष 1854 से जुड़ा हुआ है। जापान के वाकायामा प्रीफैक्च र में एक ग्रामीण पांच नवंबर, 1854 को आए एक उच्च तीव्रता के भूकंप के बाद आने वाली सुनामी की आशंका से चिंतित था। उसने एक पहाड़ी की चोटी पर चावल के चरखी में आग लगा दी। दूसरे ग्रामवासी जो आग बुझाने के लिए पहाड़ी पर चढ़े, वे उस सुनामी के प्रकोप से बच गए। सुनामी को लेकर प्रारंभिक चेतावनी का यह पहला उदाहरण था।
बयान के अनुसार, ‘इनामुरा नो ही’ (चावल की चरखियों का जलना) दिवस मनाने के लिए जापान समेत 142 देशों द्वारा संयुक्त रूप से एक प्रस्ताव रखा गया, जोकि आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर तीसरे संयुक्त राष्ट्र विश्व सम्मेलन एवं टिकाऊ विकास के लिए 2030 के एजेंडा के आगे की कार्यवाही थी। संयुक्त राष्ट्र संघ ने पांच नवंबर को विश्व सुनामी जागरूकता दिवस घोषित किया।
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