भोपाल/अलवर (राजस्थान), 14 अप्रैल (आईएएनएस)। जल संचयन के लिए केंद्र व तमाम राज्य सरकारों द्वारा जल संरचनाओं के सुधार का कार्य 30 अप्रैल तक न होने की स्थिति में देश के 130 संगठनों ने जल बिरादरी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र सिंह और एकता परिषद के संस्थापक पी.वी. राजगोपाल के नेतृत्व में पांच मई को दिल्ली कूच का ऐलान किया है।
इस समय देश का बड़ा हिस्सा सूखे के हालात से जूझ रहा है, आगामी मानसूनी बारिश के पानी को रोकने के बेहतर इंतजाम किए जाने की मांग चौतरफा उठने लगी है।
राजस्थान के अलवर के भीकमपुरा में तरुण भारत संघ के आश्रम में आठ दिन तक चले पर्यावरणीय व सामाजिक न्याय प्रशिक्षण शिविर में जलवायु परिवर्तन, जल, जंगल और जमीन के मुद्दे पर गहन मंथन हुआ।
डॉ. अंबेडकर की जयंती पर राजेंद्र सिंह और राजगोपाल की अगुवाई में देश के 130 संगठनों ने पानी के मुद्दे पर एकजुटता दर्शाते हुए केंद्र और राज्य सरकारों को चेतावनी दे डाली है।
जलपुरुष के नाम से चर्चित राजेंद्र सिंह ने आईएएनएस से दूरभाष पर चर्चा करते हुए आगामी रणनीति का ब्यौरा दिया। उन्होंने बताया कि एकता परिषद के संस्थापक राजगोपाल व उन्होंने गुरुवार को अलवर में एक साझा बयान जारी किया है।
बयान में कहा गया है कि बदलती जलवायु तथा वैश्विक व स्थानीय कारणों से देश में सूखे की मार लगातार बढ़ती जा रही है। देश के 11 राज्यों में इस वर्ष सूखे ने हालात और भी बुरे कर दिए हैं। देश के जिस राज्य महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा बांध बने और नहरें बनीं, वहां सूखा विकराल रूप धारण कर चुका है। पानी ढोने के काम में ट्रेनों को लगाना पड़ा है। लातूर में ‘पानी का कर्फ्यू’ लग गया है।
बयान में आगे कहा गया है कि मौसम विभाग ने आगामी मानसून में 106 फीसदी बारिश का अनुमान व्यक्त किया है, इसलिए जरूरी है कि जब बारिश का पानी आए, तो उसे रोककर जमीन के भीतर पहुंचाया जाए। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि जल संचयन की संरचनाओं को अभी से दुरुस्त करने का अभियान चलाया जाए।
संयुक्त बयान में कहा गया है कि दलित-वंचित समुदाय की जिंदगी की बेहतरी के लिए पानी के काम को जरूरी मानते हुए कभी स्वयं बाबा साहब ने कोंकण के महा से दलित जलाधिकार के लिए संघर्ष शुरू किया था।
इस दृष्टि से 14 अप्रैल को बाबा साहब अंबेडकर जयंती पर पानी, प्रकृति, अन्य जीवों व इंसानी जरूरतों के प्रति संवेदनशील 130 संगठनों ने पानी संचय के लिए अभियान चलाने का फैसला लिया है। इस आंदोलन में सभी वर्गो से नाता रखने वाले संगठन शामिल हैं।
दोनों सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आमजन से अपनी निजी जल संरचनाओं को दुरुस्त करने की अपील के साथ कहा है कि 30 अप्रैल तक पंचायतें, स्थानीय निकाय, प्रशासन और शासन उनके अधिकार के जलसंचयन ढांचों को दुरुस्त करने का काम शुरू नहीं करती हैं तो उन जल संरचनाओं की सूची सार्वजनिक किया जाएगा।
कहा गया है कि श्रम दिवस एक मई को स्थानीय नागरिक, समुदाय व नागरिक संगठन एकजुट सभी जल संचयन ढांचों को अपने अधिकार में लेकर श्रम आधारित जल संचयन संकल्प सत्याग्रह किया जाएगा।
राजेंद्र सिंह ने आईएएनएस को दूरभाष पर बताया कि एक अप्रैल तक जल संचयन संरचनाओं का सरकारी स्तर पर सुधार न होने और समुदाय को काम न करने देने की स्थिति में देश भर के विभिन्न हिस्सों से सामाजिक कार्यकर्ता पांच मई को दिल्ली के लिए कूच करेंगे।
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ जल संचयन तक ही सीमित नहीं होगा, बल्कि जल सुरक्षा अधिनियम की मांग को लेकर होगा।
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