पणजी, 28 नवंबर (आईएएनएस)। पुरानी और नई पीढ़ी के बीच चौड़ी होती खाई पर गहरी चिंता जाहिर करते हुए फिल्म ‘रेडियोपेत्ती’ के निर्देशक हरि विश्वनाथ ने कहा कि 46वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी) में वह अपनी फिल्म की स्क्रीनिंग को लेकर बेहद गर्व महसूस कर रहे हैं और करियर की शुरुआत करने वाले एक फिल्म निर्माता के लिए यह एक वास्तविक सम्मान है।
मीडिया सेंटर में ‘निर्देशक से मिलिए’ कार्यक्रम में मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए विश्वनाथ ने कहा कि वृद्ध लोगों से जुड़े मुद्दों को आवाज देने के लिए सोशल मीडिया पर ध्यान केंद्रित करने की बजाय एक उपयुक्त मंच बनाए जाने की आवश्यकता है।
‘रेडियोपेत्ती’ एक वृद्ध शख्स अरुणाचलम की कहानी है, जिसे अपने बचपन के दौर के गानों को सुनने में काफी सुकून महसूस होता है। ये गाने वह एक विंटेज रेडियो सेट पर सुनता है, जो उसे उसके पिता ने दिया था।
एक बार दुर्भाग्य से उसके परिवार के सदस्यों की जान खतरे में पड़ जाती है। ऐसी स्थिति में अरुणाचलम के पास दो ही विकल्प बचते हैं, या तो वह अपने परिवार को चुने या फिर अपने संगीत को। वह जानता है कि वह दोनों में से किसी एक को खोने वाला है। अब वह किसे चुनेगा और किसका बलिदान देगा?
फिल्म निर्माता हरी विश्वनाथ ने अपने पहली लघु फिल्म ‘इदुक्कन’ न सिर्फ लिखी, बल्कि उसका निर्देशन भी किया। इस फिल्म को नॉर्वे फिल्म फेस्टिवल (2013) में सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म पुरस्कार का अवॉर्ड मिला। तब से वह सक्रिय रूप से फिल्मों का निर्देशन और कहानी लेखन का कार्य कर रहे हैं।
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