पणजी, 10 जून (आईएएनएस)। गोवा के लोक निर्माण विभाग के मंत्री सुदिन धवलीकर ने शुक्रवार को पुर्तगाली वाणिज्यदूतावास को पणजी से हटाकर दिल्ली में स्थापित करने की अपनी मांग दोहराते हुए कहा कि इससे ‘गोवा के निवासियों द्वारा दोहरी नागरिकता लेने पर रोक लगेगी।’
धवलीकर ने सचिवालय में संवाददाताओं से कहा, “मैं अपनी मांग दोहराते हुए कहता हूं कि पुर्तगाल के वाणिज्यदूतावास को दिल्ली स्थानांतरित कर देना चाहिए।”
सात जून को गोवा के स्वतंत्रता सेनानियों ने पुर्तगाल के वाणिज्यदूतावास को बंद करने की मांग की है, जो पुर्तगाल की नागरिकता के इच्छुक गोवा के निवासियों की एक अद्वितीय नागरिकता कानून के तहत उनके आवेदन को स्वीकार कर कार्रवाई करता है।
स्वतंत्रता सेनानी और जानेमाने कवि नागूएश करमाली का कहना है, “पुतर्गाल अभी भी गोवा और भारत के आतंरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है। हम उन गोवावासियों को सजा देने की मांग कर रहे हैं, जिन्होंने पुर्तगाल की नागरिकता ली है। दोहरी नागरिकता देश की सुरक्षा के लिए खतरा है।”
गोवा पुर्तगाल की सबसे पुरानी कॉलोनियों में से एक है, जिसे भारतीय सेना ने 1961 में आजाद कराया था। इसके बाद सभी गोवावासियों को एक अधिसूचना के माध्यम से भारतीय नागरिकता दी गई।
हालांकि पुर्तगाल ने गोवा के निवासियों को जो उनके शासन के दौरान पैदा हुए, उन्हें अपनी नागरिकता देता है। बाद में इस नियम को अगली दो पीढ़ियों तक बढ़ा दिया गया। अब तक करीब दो लाख गोवा वासियों ने पुर्तगाल की नागरिकता ली है, हालांकि इसी दौरान उन्होंने अपनी भारतीय नागरिकता भी बरकरार रखी है।
गृह मंत्रालय ने अब गोवा में एक प्राधिकरण का गठन कर एक-एक मामले के आधार पर नागरिकता मामले की जांच का वादा किया है।
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