पूरे उप्र को किया जाए सूखाग्रस्त घोषित : भाजपा

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष लक्षमीकांत वाजपेयी ने कहा कि प्रदेश में धान उत्पादन का 59.55 प्रतिशत लाख हेक्टेयर क्षेत्र है और देश में 7वां स्थान है। इसी प्रकार दलहन के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश देश में 5वें स्थान पर है। लेकिन कम वर्षा होने के कारण वर्षा पर आधारित ये फसलें बर्बाद हो गई हैं। वर्ष 2013 में औसत सामान्य वर्षा 95 प्रतिशत हुई, 2014 में 52 प्रतिशत वर्षा हुई और 2015 में 50.65 प्रतिशत वर्षा हुई।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश के 69 जिले औसत से कम वर्षा के हैं और सूखे की चपेट में हैं। अभी तक केवल मुजफ्फरनगर, शामली, सम्भल, बिजनौर, मुरादाबाद और लखीमपुर खीरी जनपदों में औसत से अधिक वर्षा है, शेष सभी जिले सूखे की चपेट में हैं।

उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड में 44 प्रतिशत, मध्य उत्तर प्रदेश में 45 प्रतिशत, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 63 प्रतिशत और पूर्वी उत्तर प्रदेश में वर्षा का औसत 52 प्रतिशत रहा है। बुंदेलखंड क्षेत्र की सर्वाधिक बुरी स्थिति है।

वाजपेयी ने कहा कि दलहन की फसल पूरी तरीके से समाप्त हो चुकी है। वर्ष 2014 में सूखा, 2015 में अति वृष्टि, ओला वृष्टि और 2015 के सेकेंड हाफ में फिर सूखा ने प्रदेश के किसानों की कमर तोड़ दी है।

इन आंकड़ों का हवाला देते हुए पार्टी ने तत्काल प्रभाव से 69 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने और शत प्रतिशत नुकसान की भरपाई राज्य सरकार आपदा राहत कोष से करने की मांग की है।

पार्टी ने कहा है कि इसके साथ ही सिंचाई के लिए अतिरिक्त बिजली, रियायती दर पर डीजल की तत्काल व्यवस्था की जाए। सभी प्रकार के देयों तथा कर्ज व बिजली मूल्य की वसूली माफ की जाए।

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