कोलकाता, 8 जनवरी (आईएएनएस)। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को कहा कि देश की विकास दर में पूर्वी राज्य कम से कम 1 से 1.5 फीसदी तक का योगदान कर सकते हैं। ऐसा उन राज्यों में बुनियादी ढांचों और सार्वजनिक मद में निवेश से होगा।
कोलकाता, 8 जनवरी (आईएएनएस)। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को कहा कि देश की विकास दर में पूर्वी राज्य कम से कम 1 से 1.5 फीसदी तक का योगदान कर सकते हैं। ऐसा उन राज्यों में बुनियादी ढांचों और सार्वजनिक मद में निवेश से होगा।
जेटली ने बंगाल वैश्विक उद्योग सम्मेलन को संबोधित करते हुए यहां कहा, “आज जहां दुनिया भर में मंदी छाई है, हम इससे बचे हुए हैं। यहां तक कि विश्व बैंक ने भी कल कहा था कि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है।”
जेटली ने कहा, “सबसे तेज अर्थव्यवस्था होने के बावजूद हम किस प्रकार अपनी तेजी में और इजाफा कर सकते हैं? अगर विपरीत परिस्थिति में भारत 7-7.5 फीसदी की दर से विकास कर सकता है तो यह असंभव नहीं है कि हम सबसे आगे निकल जाएं। इससे रोजगार पैदा होंगे और गरीबी को मिटाने में मदद मिलेगी। इससे हमें गरीबों की और सेवा करने के लिए और अधिक संसाधन मिलेगा।”
जेटली ने विकास दर बढ़ाने के लिए तीन कदमों पर जोर दिया।
मंत्री ने कहा, “मैं सोचता हूं कि भारत को अधिक से अधिक निवेश करने की जरूरत है। सबसे पहले हमें बुनियादी संरचनाओं पर निवेश बढ़ाना होगा। हम पिछले एक सालों से इसमें बढ़ोतरी कर रहे हैं और हमारा इरादा आगे भी इसी दिशा में काम करने का है।”
“हमें सामाजिक बुनियादी ढांचे में सरकारी धन को खर्च करने की जरूरत है और मैं समझता हूं कि तीसरा सबसे अधिक महत्वपूर्ण क्षेत्र ग्रामीण क्षेत्र है जहां निवेश की जरूरत है। हमें ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई, सड़क, बिजली इत्यादि में निवेश करने की जरूरत है। इनमें खर्च करने से ही अर्थव्यवस्था बढ़ेगी।”
जेटली ने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्यों को ज्यादा आर्थिक अधिकार देने की नीति अपनाई है। उन्होंने कहा कि वित्त आयोग ने राज्यों को ज्यादा धन देने की सिफारिश की है ताकि वे अपनी आर्थिक क्षमता को बढ़ा सकें।
उन्होंने कहा, “जहां तक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का सवाल है। तो पश्चिमी भारत के राज्यों ने उचित विकास दर हासिल कर लिया है। लेकिन अब पूर्वी भारत के राज्य जीडीपी में एक से दो फीसदी तक का योगदान करेंगे।”
जेटली ने आगे कहा, “इसलिए हम पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार और पश्चिम बंगाल तक और उत्तर पूर्व से लेकर उड़ीसा तक ध्यान दे रहे हैं। यहां विकास की बहुत अधिक क्षमता है।”
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