नई दिल्ली, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को पेरिस समझौते पर हस्ताक्षर को मंजूरी दे दी। जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौता वैश्विक जलवायु सहयोग में एक मील का पत्थर है।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन (स्वतंत्र प्रभार) राज्य मंत्री प्रकाश जावड़ेकर 22 अप्रैल, 2016 को संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून द्वारा बुलाए गए एक उच्चस्तरीय हस्ताक्षर समारोह में भारत की तरफ से इस समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे।
पेरिस समझौता विकासशील देशों की विकास की अनिवार्यताओं को स्वीकार करता है। यह समझौता विकास के लिए विकासशील देशों के विकास के अधिकारों तथा पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास को मान्यता देता है।
यह समझौता सम्मेलन के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करता है लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों और क्षमता के सिद्धांतों को दशार्ता है।
समझौते का उद्देश्य यह सुनिश्चित करता है कि यह समन केन्द्रित नहीं है और इसमें अन्य महत्वपूर्ण तत्व जैसे अनुकूलनता, नुकसान और क्षति, वित्त, प्रौद्योगिकी, क्षमता निर्माण और पारदर्शिता तथा सहयोग शामिल है।
भारत ने सम्मेलन के दौरान सिद्धांतों और प्रावधानों के आधार पर एक मजबूत और टिकाऊ जलवायु समझौते की वकालत की थी। पेरिस समझौता भारत की सभी महत्वपूर्ण चिंताओं और उम्मीदों का समाधान करता है।
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