चेन्नई, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। हाल ही में हिट हुई तमिल फिल्म ‘तमिलुकु एन ओंदराय अझुथवुम’ में नजर आए अभिनेता नकुल एक दशक से अधिक समय से तमिल फिल्मोद्योग का हिस्सा हैं। नकुल का कहना है कि हर कोई पैसे पर ध्यान देने वाला बन गया है, इसलिए अलोचनात्मक सफलता कोई मायने नहीं रखती।
चेन्नई, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। हाल ही में हिट हुई तमिल फिल्म ‘तमिलुकु एन ओंदराय अझुथवुम’ में नजर आए अभिनेता नकुल एक दशक से अधिक समय से तमिल फिल्मोद्योग का हिस्सा हैं। नकुल का कहना है कि हर कोई पैसे पर ध्यान देने वाला बन गया है, इसलिए अलोचनात्मक सफलता कोई मायने नहीं रखती।
नकुल ने आईएएनएस को बताया, “मुझे नहीं लगता कि आज आलोचनात्मक सफलता मायने रखती है। यह व्यावसायिक सफलता बननी चाहिए। निर्माता खास पैसे के प्रति बहुत सजग हो गए हैं। जब आप इन सभी पर विचार करते हैं, तो आपको लगता है कि यहां बने रहने के लिए एक अच्छी फिल्म की जरूरत है।”
उन्होंने कहा, “जब कोई नया हीरो बाजार में आता है, उसे बॉक्स ऑफिस के व्यापार पर प्रभाव बनाना पड़ता है, अन्यथा यहां बने रहना मुश्किल होता है। हीरो बनना आसान है, लेकिन शीर्ष पर बने रहना बहुत ज्यादा कठिन होता है।”
अपनी नई फिल्म को मिली सफलता को लेकर नकुल ने कहा कि वह 2009 से किसी सफल फिल्म का इंतजार कर रहे थे।
नकुल बताया कि ‘तमिलुकु एना’ उनके लिए परीक्षा की तरह थी और इसकी सफलता ने उन्हें आश्वस्त किया कि वह अपने करियर में सही रास्ते चल रहे हैं। उन्हें एहसास हुआ कि अच्छी पटकथा मिलने तक इंतजार करना सही होता है।
निर्माता शंकर निर्देशित 2003 में आई तमिल फिल्म ‘ब्वायज’ से अभिनय की शुरुआत करने वाले नकुल ने अभी तक सिर्फ आठ फिल्मों में काम किया है।
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि उद्योग में किस्मत ज्यादा काम करती है। लेकिन मैं अपने करियर से खुश हूं। मुझे कोई शिकायत नहीं है।”
उन्हें अपने साथियों की सफलता से ईष्र्या नहीं है।
जब उन्हें कोई ऑफर नहीं मिल रहा था, तो उन्होंने खुद को गायन में व्यस्त रखा।
नकुल की अगली तमिल फिल्म ‘नाराथन’ है।
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