हरिद्वार, 19 जुलाई (आईएएनएस)। अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि भारतीय संस्कृति जितनी प्राचीन है, उतनी ही गुरु पूर्णिमा का प्रचलन। गुरु से शिष्य का संबंध प्रगाढ़ होने से ही उसका कायाकल्प होता है। गुरु अपने शिष्य को ऐसे सांचे में ढालता है, जिससे उसका सभी प्रकार का कल्याण हो।
डॉ. पण्ड्या गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में आयोजित गुरुपूर्णिमा-व्यास पूर्णिमा के मुख्य कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
इस अवसर पर अपने आराध्यदेव-सद्गुरु के चरणों में श्रद्धांजलि समर्पित करने आए हजारों शिष्यगण उपस्थित थे।
उन्होंने आदिगुरु शंकराचार्य, स्वामी रामकृष्ण आदि सद्गुरुओंको याद करते हुए कहा कि अनगढ़ शिष्य को सुगढ़ बनाने में गुरु अपना सब कुछ लगा देता है। ऐसे ही पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा जी ने अपने शिष्यों के लिए गायत्री साधना का सरलीकरण, समस्त समस्याओं के समाधानपरक साहित्य की रचना की एवं विभिन्न प्रशिक्षण सत्रों का संचालन किया। उनके पदचिन्हों पर चलते करोड़ों शिष्य समाज के विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित हैं।
डॉ. पण्ड्या ने गीता व उपनिषद् के सूत्रों का उल्लेख करते हुए शिष्य के श्रद्धा संवर्धन के विविध सूत्रों की व्याख्या की।
देसंविवि के कुलाधिपति डॉ. पण्ड्या ने कहा कि अपने घर से एक युवा को ऐसे गढ़ें, बनाएं जो लोकसेवी बनें और समर्पणभाव से समाज निर्माण का कार्य करें। साथ ही डॉ. पण्ड्या ने लोक आराधना के रूप में जलस्रोतों का संरक्षण करने एवं पौधरोपण को गति देने का आवाहन किया।
गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. पण्ड्या एवं शैल दीदी ने गुरुपूर्णिमा व व्यासपूर्णिमा पर वैदिक कर्मकांड के साथ पूजन किया।
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