कोलकाता, 9 जुलाई (आईएएनएस)। पार्टी के विरोध के बावजूद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मानस भुइयां ने औपचारिक तौर पर लोक लेखा समिति(पीएसी) का अध्यक्ष पद स्वीकार कर लिया है। इसके एक दिन बाद ही पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई ने शनिवार को आधिकारिक तौर पर उनसे यह पद छोड़ देने का आग्रह किया।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सुजान चक्रबर्ती को पीएसी अध्यक्ष नियुक्त करने का कांग्रेस पार्टी व विपक्ष के नेता अब्दुल मन्नान के आग्रह को ठुकराते हुए विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने गत चार जुलाई को भुइयां की नियुक्ति की घोषणा की थी।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी सहित पार्टी की ओर से इस्तीफा देने का आग्रह करने के बावजूद भुइयां ने शुक्रवार को आधिकारिक रूप से यह पद यह कहते हुए स्वीकार कर लिया कि पार्टी की ओर से उन्हें इस्तीफा देने को नहीं कहा गया है।
प्रदेश कांग्रेस की बैठक में, जिसमें 39 विधायक उपस्थित थे, तय किया गया कि वे औपचारिक रूप से इस बारे में एक प्रस्ताव भेजेंगे।
पार्टी के विधायकों से मुलाकात के बाद चौधरी ने कहा, “भुइयां ने खुद कहा है कि वह पार्टी के एक अनुशासित कार्यकर्ता हैं। पार्टी के विधायक पीएसी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के लिए उनके पास एक प्रस्ताव भेज कर आग्रह करेंगे कि वह तृणमूल कांग्रेस की जाल में न फंसें।”
उन्होंने कहा कि चूंकि यह निर्णय अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) ने लिया है, इसलिए भुइयां को पद छोड़ना चाहिए।
चौधरी ने इस पर भी सवाल उठाया कि जिस दिन भुइयां के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया, उन्हें पीएसी के अध्यक्ष पद से नवाजा गया।
अपनी नियुक्ति को औपचारिक तौर पर स्वीकार करते हुए भुइयां ने शुक्रवार को दावा किया था कि हालांकि उनसे अनौपचारिक तौर पर इस्तीफा देने को कहा गया है, लेकिन पार्टी ने आधिकारिक तौर अपने इस विचार से उन्हें अवगत नहीं कराया है कि वह चक्रवर्ती को पीएसी अध्यक्ष के रूप में चाहती है।
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