कोलकाता, 21 जनवरी (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल की एक फास्ट ट्रैक अदालत ने देश में भीषण हमलों की साजिश रचने के दोषी लश्कर-ए-तैयबा के तीन आतंकवादियों को शनिवार को मौत की सजा सुनाई।
बनगांव के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बिनय कुमार पाठक ने पाकिस्तान के कराची निवासी मोहम्मद युनूस व मोहम्मद अब्दुल्ला तथा एक भारतीय नागरिक मोहम्मद मुजफ्फर अहमद को देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने को लेकर मौत की सजा सुनाई।
लश्कर-ए-तैयबा के अन्य आतंकवादियों के साथ तीनों को साल 2007 में उत्तरी 24 परगना जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा पर उस वक्त पकड़ा गया था, जब वे भारत में घुसने का प्रयास कर रहे थे।
अदालत ने बीते सोमवार को तीनों को धारा 121 (भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ना या ऐसा करने का प्रयास करना) व 121 ए (धारा 121 के तहत दंडनीय अपराध करने की साजिश) के तहत दोषी करार दिया।
अहमद जम्मू एवं कश्मीर के अनंतनाग का निवासी है।
लश्कर-ए-तैयबा का एक अन्य आतंकवादी शेख नईम उर्फ समीर महाराष्ट्र के औरंगाबाद का निवासी है, जो साल 2013 से ही पुलिस की हिरासत से फरार है।
चारों आतंकवादियों ने ढाका के मून होटल में भारत में भीषण हमलों को अंजाम देने की साजिश रची।
उन्हें अप्रैल 2007 में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने गिरफ्तार किया था और बाद में पश्चिम बंगाल पुलिस के खुफिया विभाग को सौंप दिया था।
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