नई दिल्ली, 30 जनवरी (आईएएनएस)। विपक्षी दलों ने पहली फरवरी को सरकार द्वारा आम बजट पेश करने की आलोचना करते हुए सोमवार को कहा कि वे संसद के बजट सत्र में नोटबंदी का मुद्दा उठाएंगे।
संसद की लाइब्रेरी बिल्डिंग में हुई सर्वदलीय बैठक के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि समय से पहले बजट पेश करने का निर्णय लेना लोकतांत्रिक प्रथाओं के खिलाफ है।
सिंधिया ने कहा, “जिस तरीके से सरकार ने 1 फरवरी को बजट पेश करने का निर्णय लिया है, वह अलोकतांत्रिक है। हमारी सरकार ने 2012 में चुनाव होने तक बजट को टाल दिया था।”
सर्वदलीय बैठक में तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना ने भाग नहीं लिया। बैठक में विपक्षी दलों ने 5 राज्यों में 4 फरवरी से विधानसभा चुनाव शुरू होने से पहले बजट की तारीख बदलकर 1 फरवरी किए जाने पर सवाल उठाया।
कांग्रेस नेता ने कहा कि उनकी पार्टी नोटबंदी, नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम के उल्लंघन में वृद्धि और देश के सुरक्षा परिदृश्य के मुद्दों को उठाएगी।
उन्होंने कहा, “इस बार सत्र की अवधि आधी से कम है। इसलिए हमने सरकार से कहा है कि वे इन मुद्दों पर बातचीत के लिए दो दिन और राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के लिए तीन दिन और बढ़ाए।”
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि समय से पहले बजट पेश करने के बुरे नतीजे सामने आएंगे।
उन्होंने कहा, “सरकार के पास इस साल की दूसरी तिमाही तक के आंकड़े हैं और अभी तीसरी तिमाही के आंकड़े आए नहीं हैं। नोटबंदी के कारण अर्थव्यवस्था पर काफी विपरीत प्रभाव पड़ा है। इसके असर को बजट में शामिल नहीं किया जा सकेगा, क्योंकि अभी तक आंकड़े आए नहीं हैं। इसलिए सरकार को बजट को स्थगित कर देना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी भी संसद में नोटबंदी पर चर्चा करना चाहती है।
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