नई दिल्ली, 18 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती ने देश में बांधों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत को रेखांकित किया है।
नई दिल्ली में गुरुवार को बांध पुनर्वास एवं सुधार परियोजना से प्राप्त सबक पर आयोजित एक कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि देश में जो बड़े बड़े बांध बनाए गए हैं उनका समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है।
भारती ने कहा कि इन बांधों में एकत्र किये गए पानी का हम समुचित उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय की बांध पुनर्वास एवं सुधार परियोजना को एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम बताते हुए उन्होंने कहा कि आज ज्यादा जरूरत इस बात की है हम देश में नए जलाशयों के निर्माण से पहले से मौजूदा जलाशयों का सौ प्रतिशत इस्तेमाल सुनिश्चित करें।
मंत्री ने कहा कि साथ ही हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि बांधों के निर्माण में जो खामियां रह गई उनसे सबक लेकर उन्हें भविष्य में ना दोहराएं। केदारनाथ विभीषिका का उल्लेख करते हुए भारती ने कहा कि हमें उससे भी बहुत सबक लेने हैं।
केदारनाथ से ऊपर स्थित गांधी सरोवर का सीमेंटीकरण करते समय उसमें से प्राकृतिक निकास की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। इस वजह से जब उसमें एकाएक भारी मात्रा में पानी आया तो उसने प्राकृतिक आपदा का रूप ले लिया जो केदारनाथ विभीषिका के रूप में सामने आई। इसलिए इन सब बातों को देखते हुए यह बहुत जरूरी है कि हम जलाशयों और बांधों की सुरक्षा को लेकर बहुत सचेत रहे।
देश की अपार जल संपदा का उल्लेख करते हुए भारती ने कहा कि यदि हम इसका समुचित उपयोग कर पाये तो देश को बाढ़ और सूखे जैसी समस्याओं से लगभग निजात मिल जाएगी और देश के कृषि क्षेत्र को सिंचाई के लिए समुचित जल उपलब्ध हो सकेगा। उन्होंने कहा कि राज्य अपने बांधों को लेकर निरंतर सतर्क रहें।
मंत्री ने कहा कि जलाशयों से पानी छोड़ते समय हमें अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है ताकि ऐसा करते समय निचले इलाकों में रहने वालों को अतिरिक्त पानी से कोई नुकसान ना पहुंच पाये। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि एकाएक बड़ी मात्रा में पानी छोड़ने से होने वाली दुर्घटनाओं को ना होने दिया जाए।
इस अवसर पर मंत्री ने बांध पुर्नवास एवं सुधार परियोजना की हिंदी वेबसाइट का भी शुभांरभ किया। उन्होंने द्वितीय राष्ट्रीय बांध सुरक्षा सम्मेलन में प्रस्तुत किए गए प्रपत्रों के एक संकलन और बांध से संबंधित आपात सुरक्षा योजनाओं से संबंधित दिशा निदेशरें के एक संकलन का भी विमोचन किया।
इस एक दिवसीय कार्यशाला में बांध के प्रचालन और रखरखाव की निगरानी से जुड़े 16 राज्यों के प्रतिनिधि तथा विशाल बांधों के स्वामित्व से जुड़े अन्य संगठनों के पदाधिकारियों ने भाग लिया। देश में बांधों की सुरक्षा के महत्व को महसूस करते हुए, भारत सरकार ने बांध पुनर्वास एवं सुधार परियोजना की वर्ष 2012 में शुरूआत की। यह परियोजना सात राज्यों में लगभग 250 बांधों की स्थिति में सुधार लाने के लिए प्रारंभ की गई है।
भारत में लगभग 4900 विशाल बांध हैं और उनमें से लगभग 80 प्रतिशत 25 साल से भी ज्यादा पुराने हैं।
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