इंदौर, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि देश में बांस की क्रांति पैदा की जा सकती है और बांस के उत्पादन को बढ़ावा देकर भारत की आर्थिक स्थिति को और अधिक मजबूत किया जा सकता है।
उन्होंने यह बात मध्यप्रदेश की व्यापारिक नगरी इंदौर में शुक्रवार से शुरू हुई तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय बांस सम्मेलन के शुभारंभ कार्यक्रम में कही। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय भूतल परिवहन तथा राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नीतिन गडकरी ने की। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह बतौर अतिथि मौजूद थे।
सुमित्रा ने कहा कि भारत में बांस क्षेत्र का तेजी से विकास करने की जरूरत है। बांस उत्पादन तथा बांस के उत्पादों के संबंध में नई नीति और नई तकनीकी का विकास भी अत्यंत जरूरी है। भारत में अगर बांस का उत्पादन बढ़ता है तो देश के विकास को एक नई दिशा मिलेगी। देश में बांस आधारित आर्थिक व्यवस्था हो सकती है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि मध्यप्रदेश में बांस उत्पादन एवं इसके मूल्यवर्धित उत्पादों के क्षेत्र में बेहतर कार्य किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि देश में गरीबी एवं बेरोजगारी के कारण लोगों का गांव से शहरों की ओर पलायन भी सबसे बड़ी चिंता का विषय है। खेती के साथ हस्तशिल्प को प्रोत्साहित कर इन समस्याओं से निपटा जा सकता है।
गडकरी ने कहा, “बांस का उत्पादन बढ़ाकर भी हम देश से गरीबी और बेरोजगारी की समस्या को दूर कर सकते हैं। गांव और शहर की खाई को भी पाटा जा सकता है।”
बैम्बू फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट ग्लोबल कोआपरेशन पर केंद्रित इस सम्मेलन का उद्देश्य बांस उत्पादन, कारीगर, उद्यमियों और तकनीकी विशेषज्ञों को विचार-विमर्श के लिए एक मंच उपलब्ध कराना, बांस का उपार्जन, बांस नीति, बांस नवाचार आदि पर चर्चा करना है। इस सम्मेलन में भारत सहित 11 देशों के प्रतिनिधि भी हिस्सा ले रहे हैं।
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा, “मध्यप्रदेश को देश का बैम्बू कैपिटल बनाया जाएगा। बांस मिशन हमारा लक्ष्य है। इस मिशन के माध्यम से बांस के वन क्षेत्र का विस्तार किया जाएगा और बांस की व्यावसायिक खेती भी कराई जाएगी।”
उन्होंने कहा कि बांस को मप्र में कृषि उत्पाद माना जाएगा। राज्य में बांस के माध्यम से अधिकतम रोजगार पैदा करने के प्रयास किए जाएंगे।
इस मौके पर राधामोहन सिंह ने कहा कि बांस जीवन की अनेक आवश्यकताओं की पूर्ति करता है। बांस का परंपरागत उपयोग के साथ ही गृह साज-सज्जा, औषधि और भोजन के रूप में भी किया जा रहा है। बांस का उत्पादन गरीबी उन्मूलन में भी कारगर है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बांस क्षेत्र के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। 28 राज्यों में बांस मिशन के तहत कार्य किए जा रहे हैं।
सिंह ने कहा, “हमारे देश के कुल वनक्षेत्र का 13 प्रतिशत हिस्सा बांस वन है। भारत में 137 से अधिक प्रजाति के बांस होते हैं। इसका 1500 से अधिक तरीके से उपयोग होता है। बांस लकड़ी का विकल्प भी बन सकता है।”
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