नई दिल्ली, 22 दिसम्बर (आईएएनएस)। बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने किशोर न्याय विधेयक के विरोध में यहां मंगलवार को विरोध-प्रदर्शन किया।
किशोर न्याय विधेयक में संशोधन कर जघन्य अपराधों में संलिप्त पाए जाने वाले 16 से 18 वर्ष के किशोरों पर वयस्कों के समान मुकदमा चलाने की मांग की जा रही है।
बाल अधिकार कार्यकर्ता कुमार वी.जयगिरधर ने एक बयान में कहा, “हमें लगता है कि एक दुर्भाग्यपूर्ण निर्भया मामला सभी दोषी किशोरों का भाग्य तय नहीं कर सकता।”
उन्होंने कहा कि यौन अपराधों से बच्चों की सुरक्षा के मौजूदा कानून (पोक्सो) का कई मामलों में दुरुपयोग हो रहा है।
उन्होंने कहा कि संसद में इस पर राष्ट्रीय चर्चा कराई जानी चाहिए कि मौजूदा कानून में संशोधन को हरी झंडी दी जानी चाहिए या नहीं।
गौरतलब है कि 16 दिसंबर सामूहिक दुष्कर्म मामले के दोषी ‘किशोर’ की रिहाई को लेकर हुए हंगामे के बीच सदस्यों की मांग पर किशोर न्याय विधेयक को सोमवार को संसद में चर्चा कराने और पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किया गया। अब इसे मंगलवार को राज्यसभा में रखे जाने की संभावना है।
जयगिरधर चाइल्ड राइट्स इनिशिएटिव फॉर शेयर्ड पैरेंटिंग (सीआरआीएसपी) के अध्यक्ष हैं।
वहीं, सीआरआईएसपी की सदस्य सुधा राजशेखर ने कहा, “बेहतर यही है कि सिर्फ एक हादसे (निर्भया सामूहिक दुष्कर्म) के आधार पर कानून में कोई बदलाव न किया जाए।”
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