पटना, 1 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली की ओर से गुरुवार को लोकसभा में पेश आम बजट में बिहार के लिए कोई विशेष सहायता नहीं दिए जाने पर कई लोग इसे निराशाजनक बजट बता रहे हैं, तो कई लोग इसे गरीबों, किसानों और आम लोगों का बजट बता रहे हैं। वे इसे संतुलित और ग्रामीण भारत का बजट कहकर इसकी सराहना कर रहे हैं।
पटना, 1 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली की ओर से गुरुवार को लोकसभा में पेश आम बजट में बिहार के लिए कोई विशेष सहायता नहीं दिए जाने पर कई लोग इसे निराशाजनक बजट बता रहे हैं, तो कई लोग इसे गरीबों, किसानों और आम लोगों का बजट बता रहे हैं। वे इसे संतुलित और ग्रामीण भारत का बजट कहकर इसकी सराहना कर रहे हैं।
बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष पी़ क़े अग्रवाल ने इस बजट को बिहार के दृष्टिकोण से निराशाजनक, जबकि पूरे देश के दृष्टिकाण से स्वागतयोग्य बजट करार दिया है।
उन्होंने बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, “इस बजट में बिहार जैसे पिछड़े राज्यों के लिए कुछ नहीं कहा गया है, परंतु देश के दृष्टिकोण से इस बजट में सभी वर्गो के लिए कुछ न कुछ किया गया है। कुल मिलाकर यह स्वागतयोग्य बजट है।”
उन्होंने 50 करोड़ गरीब लोगों को पांच लाख रुपये तक चिकित्सा सुविधा देने तथा सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाकर उत्पादन मूल्य का 1़5 गुना किए जाने की घोषणा को बेहतर कदम बताया।
वरिष्ठ अर्थशास्त्री और पटना कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ़ नवल किशोर चौधरी ने इस बजट को नवउदारवरदी बजट बताया। उन्होंने बजट में कृषि, ग्रामीण और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उठाए गए कदमों का स्वागत करते हुए कहा कि इस बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुधार के लिए कई तरह के कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि बजट में क्षेत्रीय असमानता को लेकर कोई बात नहीं की गई, जिससे बिहार जैसे पिछड़े राज्य के लोगों को निराशा हुई है।
चौधरी ने बजट में अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार सृजन करने के लिए बल दिए जाने तथा प्रत्येक वर्ग समूह को कुछ न कुछ दिए जाने का प्रयास का स्वागत किया। उन्होंने बजट में शिक्षा के क्षेत्र में किसी तरह की विशेष पहल नहीं किए जाने की आलोचना की।
इधर, बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष क़े पी़ एस़ केशरी ने लोकसभा में पेश बजट को अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने वाला बजट बताया।
उन्होंने कहा, “लोगों को आशा थी कि पेश होने वाला यह बजट चुनावी होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यह बजट अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाला बजट साबित होगा। बजट में कृषि और स्वास्थ पर विशेष जोर दिया गया, जो स्वागतयोग्य है, परंतु बिहार के लिए विशेष कुछ नहीं दिया जाने से निराशा हुई है।”
पटना के राजा बजार की रहने वाली घरेलू महिला प्रियंका अग्रवाल कहती हैं कि मध्यमवर्गीय परिवार के लिए खासकर महिलाओं के लिए बजट में कुछ खास नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार, महंगी शिक्षा और ‘किचेन’ के बजट को काबू में रखने के लिए भी कोई योजना नहीं दिखाई दे रहा है।
अग्रवाल ने हालांकि यह भी कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में पांच करोड़ परिवार के लोगों के लिए योजना लाया जाना स्वागतयोग्य है।
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