बिहार : चीनी मिल मजदूर की मौत मामले में सीबीआई जांच की मांग

मोतिहारी, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। बिहार के पूर्वी चंपारण जिला मुख्यालय मोतिहारी में बंद पड़ी चीनी मिल खुलवाने और बकाया राशि के भुगतान की मांग को लेकर सोमवार को आत्मदाह की कोशिश करने वाले एक मजदूर की इलाज के दौरान मंगलवार को हुई मौत के बाद यह मामला तूल पकड़ने लगा है। मृतक के परिजनों ने इस मामले को हत्या करार देते हुए इसकी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की है। वहीं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

मृतक मजदूर नरेश प्रसाद श्रीवास्तव के भाई ब्रजेश कुमार ने बुधवार को इस पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके भाई नरेश ने आत्मदाह नहीं किया, बल्कि उनकी हत्या की गई है। इस हत्या के पीछे उन्होंने मिल के मालिक विमल नोपानी और मिल प्रबंधक आऱ पी़ सिंह की साजिश बताया।

इधर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी अनुपम कुमार और पुलिस अधीक्षक जितेंद्र राणा को संयुक्त रूप से इसकी जांच करने का निर्देश दिया।

मामले पर पूर्वी चंपारण के पुलिस अधीक्षक जितेंद्र राणा ने बुधवार को कहा कि सोमवार को दर्ज एक प्राथमिकी में कुल 29 लोगों को नामजद आरोपी, जबकि 125 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

उन्होंने बताया कि इस मामले में एक अन्य प्राथमिकी मृतक की पत्नी पूर्णिमा देवी के बयान के आधार पर दर्ज की जा रही है, जिसमें चीनी मिल मालिक नोपानी और मिल प्रबंधक आऱ पी़ सिंह नामजद आरोपी हैं।

उन्होंने बताया कि मृतक मजदूर नेता की पत्नी ने अपने बयान में आरोप लगाया है कि दोनों ने असामाजिक तत्वों को भेजकर आंदोलन स्थल का माहौल बिगाड़ा और पुलिस पर पथराव करवाया। उनका आरोप है कि हंगामे के बीच उनके पति को जलाकर मार दिया गया।

राणा ने बताया कि इस मामले की जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया है, जिसमें एक पुलिस उपाधीक्षक और तीन पुलिस निरीक्षक को शामिल किया गया है।

उल्लेखनीय है कि मोतिहारी स्थित श्री हनुमान चीनी मिल मजदूर संघ पिछले 10-12 सालों से बंद पड़े चीनी मिल को खुलवाने और बकाया राशि के भुगतान सहित कई मांगों को लेकर सात अप्रैल को मिल के गेट के सामने आंदोलन कर रहे थे। इस बीच संघ सदस्यों ने चेताया था कि यदि नौ अप्रैल तक उनकी मांगें नहीं सुनी जाती हैं तो वे आत्मदाह कर लेंगे।

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