बिहार में नदियां उफान पर, कोसी व सीमांचल क्षेत्रों में बाढ़ से तबाही

पटना, 23 जुलाई (आईएएनएस)। बिहार और नेपाल के तराई क्षेत्रों में हो रही बारिश के कारण बिहार की प्रमुख नदियां विभिन्न जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। पानी के भारी दबाव से गंडक बैराज का फाटक क्षतिग्रस्त हो गया है, जबकि उत्तर व पूर्वी बिहार, कोसी व सीमांचल के कई दर्जन गांवों में बाढ़ का पानी फैल गया है।

पटना स्थित बाढ़ नियंत्रण कक्ष के मुताबिक, बिहार की प्रमुख नदियों के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की जा रही है। वीरपुर बैराज में कोसी नदी के जलस्तर में वृद्धि देखी जा रही है।

नियंत्रण कक्ष में प्रतिनियुक्त सहायक अभियंता राजेंद्र प्रसाद ने शनिवार को आईएएनएस को बताया कि शाम चार बजे वीरपुर बैराज में कोसी नदी का जलस्तर 2़51 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया, जबकि वाल्मीकिनगर बैराज में गंडक का जलस्तर 2़ 42 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया। उन्होंने बताया कि कोसी में जलस्तर बढ़ने की आशंका है।

प्रसाद ने बताया कि बागमती नदी डूबाधार, ढेंग और सोनाखान में, जबकि महानंदा ढेंगराघाट व झावा में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। कोसी वीरपुर और बालतारा में खतरे के ऊपर बह रही है।

कटिहार जिले के डेढ़ दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। अमदाबाद में गंगा का कटाव जारी है। कटाव के कारण शुक्रवार को एक प्राथमिक विद्यालय का भवन गंगा में समा गया।

मधेपुरा में कोसी नदी का जलस्तर बढ़ने से आलमनगर प्रखंड के 200 घर बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। चौसा व आलमनगर में बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते प्रशासन द्वारा बचाव कार्य प्रारंभ कर दिए गए हैं।

सुपौल जिले में कोसी नदी विकराल रूप ले चुकी है। सदर प्रखंड के मरीचा, तेलवा, मरौना के लक्ष्मीनियां गोठ खोखनाहा गांव में कटाव के कारण लोगों के घर नदी में समा रहे हैं। लोग घर-द्वार छोड़ ऊंचे स्थानों की ओर पलायन करने लगे हैं।

पूर्णिया जिले के बायसी अनुमंडल में बाढ़ की स्थिति और विकट हो गई है। बायसी अनुमंडल के तीन प्रखंड बायसी, अमौर एवं बैसा सर्वाधिक प्रभावित हैं। तीन प्रखंडों की करीब दो लाख की आबादी बाढ़ में फंसी है।

इधर, गंडक नदी में जलस्तर बढ़ने के कारण वाल्मीकिनगर बैराज का एक फाटक क्षतिग्रस्त हेा गया है। इस बीच पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीवान और गोपालगंज में बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो गया है।

इधर, फाटक की मरम्मत करने पहुंची अभियंताओं की टीम जलस्तर कम होने के बाद ही मरम्मत की संभावना बता रही है। जलस्तर बढ़ने के कारण बैराज पर पानी का दबाव बना हुआ है।

बैराज फाटक की मरम्मत करने पहुंचे विशेषज्ञ अवकाश प्राप्त यांत्रिक मुख्य अभियंता क़े एऩ लाल ने कहा कि नदी का प्रवाह तेज है। ऐसे में फाटक मरम्मत संभव नहीं है। अन्य उपायों पर भी विचार किया जा रहा है।

इधर, जलसंसाधन विभाग का दावा है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। जलस्तर की मॉनीटरिंग की जा रही है। तटबंधों पर सुरक्षात्मक कार्य कराए जा रहे हैं।

About admin


Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home4/dharmrcw/public_html/wp-includes/functions.php on line 5493