नई दिल्ली, 23 दिसम्बर (आईएएनएस)। इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्शी संहिता विधेयक बुधवार को संसद की एक संयुक्त प्रवर समिति के हवाले कर दिया गया।
सदन में यह प्रस्ताव रखते हुए केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि समिति में लोकसभा से 20 सदस्य और राज्यसभा से 10 सदस्य होंगे।
जेटली ने कहा, “इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्शी विधेयक को दोनों सदनों की संयुक्त समिति के सुपुर्द कर दिया जाए।”
उन्होंने कहा कि समिति अगले वर्ष बजट सत्र के प्रथम सप्ताह के आखिरी दिन अपनी रपट सौंपेगी।
एक दिन पहले लोकसभा में कई सदस्यों ने बगैर वित्त मामलों की स्थायी समिति में विचार हुए इस विधेयक पर सीधे बहस करने से इंकार कर दिया था।
लोकसभा के सदस्यों में शामिल हैं पी.पी. चौधरी, गोपाल शेट्टी, सुभाष चंद्र बहेरिया, निशिकांत दूबे, शिवकुमार चनबसप्पा उदासी, अनिल गुलाबराव सिरोले, अभिषेक सिंह, गजेंद्र सिंह शेखावत, संजय जायसवाल और जगदंबिका पॉल (सभी भारतीय जनता पार्टी), चंद्रकांत भाऊराव खरे (शिव सेना), जयदेव गल्ला (तेलुगू देशम पार्टी), चिराग पासवान (लोक जनशक्ति पार्टी), के.सी. वेणुगोपाल, सुष्मिता देव (कांग्रेस), पी. वेणुगोपाल (एआईएडीएमके), कल्याण बनर्जी (तृणमूल कांग्रेस), भर्तृहरि महताब (बीजू जनता दल), बी. विनोद कुमार (तेलंगाना राष्ट्र समिति) और जितेंद्र चौधरी (मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी)।
विधेयक में दिवालिया घोषित किए जाने की प्रक्रिया में लगने वाली अवधि कम करने और कंपनियों को दिए गए कर्ज की बेहतर वसूली सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है।
विधेयक के तहत प्रक्रिया में लगने वाली अवधि को 180 दिनों में सीमित करने का प्रस्ताव है, जिसे अतिरिक्त 90 दिनों के लिए बढ़ाया जा सकेगा।
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