हैदराबाद, 5 सितम्बर (आईएएनएस)। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीबी) ने फैसला किया है कि वह सरकार द्वारा जबरन थोपी जा रही ब्राह्मणवादी संस्कृति और वैदिक धर्म के खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करेगा।
बोर्ड ने अल्पसंख्यकों और अन्य समूहों की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान पर मंडरा रहे खतरे पर चिंता जताते हुए ‘दीन और दस्तूर बचाओ’ अभियान की घोषणा की।
बोर्ड ने इस अभियान में अन्य अल्पसंख्यक समूहों और दमित वर्ग के संगठनों को भी शामिल किया है।
एआईएमपीबी के महासचिव मौलाना सज्जाद नोमानी ने शनिवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ब्राह्मणवादी सामाजिक व्यवस्था तथा योग, सूर्य नमस्कार और वंदे मातरम जैसे रिवाजों को जबरन लागू करना भारतीय संविधान के खिलाफ है।
उन्होंने कहा, “इससे न सिर्फ मुसलमानों, बल्कि अन्य धार्मिक और सामाजिक समुदाय भी मुसीबत में हैं। इसीलिए मुस्लिम बोर्ड ने अपने धर्म और संविधान की रक्षा के लिए अभियान शुरू करने का फैसला किया है।”
नोमानी से जब पूछा गया कि क्या बोर्ड के प्रतिनिधि इस मसले को लेकर प्रधानमंत्री या गृहमंत्री से भी मिलेंगे, उन्होंने कहा कि यह अभी उनके एजेंडे में नहीं है।
नोमानी ने कहा कि यह काफी शर्मनाक बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते कुछ और करते कुछ हैं।
मुस्लिम नेता ने कहा कि अल्पसंख्यकों को इस विकास में उनकी धार्मिक और सामाजिक पहचान से वंचित नहीं किया जा सकता।
उन्होंने प्रधानमंत्री की आरएसएस के नेताओं के साथ हुई बैठकों पर कड़े तौर पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह भारत की सरकार है न कि हिदुओं और ब्राह्मणों की।
इस संवाददाता सम्मेलन में एआईएमपीबी सचिव मौलाना वली रहमानी, एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी, अब्दुल रहीम कुरैशी और मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी सहित कई अन्य प्रमुख सदस्य शामिल थे।
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