ढाका-बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना (Bangladesh ousted PM Sheikha Hasina) को फांसी की सजा सुनाई गई है. उन्हें ढाका में जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी पाया गया है. इस हिंसा में 1400 से ज्यादा मौतें हुई थीं.ढाका की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने सोमवार को उन्हें 5 में से दो मामले, हत्या के लिए उकसाने और हत्या का आदेश के लिए मौत की सजा दी, जबकि बाकी मामलों में उम्रकैद की सजा दी गई है.वहीं, दूसरे आरोपी और बांग्लादेश के पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान को भी 12 लोगों की हत्या का दोषी माना और फांसी की सजा सुनाई.
5 मामलों में दोषी पाई गईं शेख हसीना?
1-छात्र आंदोलन के दौरान हत्याओं का आदेश देना.
2-भड़काऊ भाषण देकर हिंसा कराना.
3-न्याय में बाधा डालना/ सबूत मिटाने की कोशिश.
4-छात्र अबु सईद की हत्या का आदेश देना.
5-चांखारपुल में 5 लोगों की हत्या कराना और उनकी लाशें जलाना.
इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल के फैसले के बाद पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और पूर्व गृहमंत्री असदुज्जमान को 30 दिनों के भीतर अपील करने का अधिकार दिया गया है. यह अपील बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट के अपील डिवीजन में दाखिल करनी होगी. सुप्रीम कोर्ट को 60 दिनों के भीतर इस अपील पर फैसला देना अनिवार्य है.
‘ब्लड मनी’ एक तरह का आर्थिक मुआवजा होता है. ये आरोपी की ओर से पीड़ित के परिवार को दिया जाता है. इसे दियात भी कहते हैं. इसका मकसद होता है कि आरोपी को माफी मिलने की संभावना बने. इस्लामिक कानून के तहत खासकर हत्या जैसे मामलों में पीड़ित के परिजनों को यह अधिकार होता है कि वे दोषी को पैसों के बदले में माफ करे या नहीं. अगर वे मुआवजा लेने को तैयार हों, तो सजा-ए-मौत को टाला जा सकता है.
ब्लड मनी की कोई तय रकम नहीं होती. ये आमतौर पर आरोपी और पीड़ित के परिवार या उनके प्रतिनिधियों के बीच आपसी सहमति से तय की जाती है. कुछ देशों में मिनिमम रकम का अनुमान तय होता है. मिनिमम अमाउंट 3 से 4 लाख अमेरिकी डॉलर (करीब ढाई से 3 करोड़ रुपये) के बीच हो सकता है.
बांग्लादेश के शरिया कानून में ब्लड मनी ने उन बांग्लादेशी नागरिकों को सुरक्षित करना है, जो ऐसे देशों में फंसे हैं;जहां शरिया कानून लागू है और उन्हें मृत्युदंड का सामना करना पड़ता है. ऐसे मामलों में बांग्लादेशी सरकार ब्लड मनी का इस्तेमाल करके अपने नागरिकों को सजा से बचाने की कोशिश करती है.यह व्यवस्था अधिकतर गैर-इरादतन हत्या जैसे मामलों में अपनाई जाती है,जानबूझकर या सोची-समझी साजिश के तहत कराई गई हत्या या हुए नरसंहार के लिए इसका इस्तेमाल नहीं होता. हालांकि, कई बार जानबूझकर की गई हत्या में भी परिवार की सहमति से यह रास्ता खुलता है.
भारत और बांग्लादेश के बीच 2013 में एक्स्ट्रडिशन ट्रीटी साइन हुई थी. इसके तहत दोनों देशों के बीच अपराधियों के एक्सचेंज की शर्तें हैं. किसी अपराधी को प्रत्यार्पित तभी किया जाएगा, जब अपराध दोनों देशों में अपराध माना जाए. इसमें कम से कम 1 साल की सजा मिली हो. आरोपी पर अरेस्ट वॉरंट हो. इस आधार पर भारत ने 2020 में शेख मुजीबुर्रहमान की हत्या के दो दोषियों को बांग्लादेश भेजा था.
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