भारतीय जीवन पद्घति से जलवायु परिवर्तन रोकना संभव : सुषमा

भोपाल, 22 नवंबर (आईएएनएस)। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने रविवार को यहां कहा कि जलवायु परिवर्तन से उपजे संकट का प्रभावी समाधान भारतीय जीवन दर्शन और जीवन पद्घति से संभव है।

सुषमा ने यहां चल रहे दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘वैश्विक तपन और जलवायु परिवर्तन : समाधान की ओर’ के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा, “भारतीय दर्शन, जीवन शैली, परंपराओं और प्रथाओं में प्रकृति की रक्षा का विज्ञान छिपा है। आवश्यकता दुनिया के सामने इसकी व्याख्या करने की है।”

उन्होंने कहा, “जब तक भारतीय दर्शन के अनुरूप जीवन शैली नहीं अपनाएंगे तब तक वैश्विक तपन जैसी समस्या का समाधान नहीं निकलेगा। इसलिए प्रकृति की रक्षा करने वाली परंपराओं और संस्कृति को पुनर्जीवित करने की जरूरत है।”

सिंहस्थ 2016 के परिप्रेक्ष्य में आयोजित विचार श्रंखला की संगोष्ठी में स्वराज ने कहा कि विश्व के सामने आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन दो बड़ी चुनौतियां हैं।

उन्होंने कहा, “आतंकवाद मनुष्य द्वारा मनुष्य पर हमला है, जबकि जलवायु परिवर्तन मनुष्य द्वारा प्रकृति पर हमला है। इस हमले की शुरुआत 18वीं सदी में औद्योगीकरण के साथ हो गई थी। कुछ विकसित देशों ने अंधाधुंध विकास की होड़ में पृथ्वी के लिए जो संकट पैदा किए हैं, अब वे उसका समाधान सबसे चाहते हैं।”

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सिंहस्थ में कृषि महाकुंभ, लघु उद्योग, स्वच्छता और बेटी बचाओ विषय पर भी वैचारिक कुंभ आयोजित किया जाएगा।

उन्होंने कहा, “मध्यप्रदेश में अभी भी बड़े क्षेत्र में जैविक खेती हो रही है, लेकिन इसके लिए किसानों पर जोर नहीं डाला जा सकता। जैविक खेती भी जीरो बजट में लाभ देती है, इसके पर्याप्त तर्क और सबूत देकर किसानों को राजी करना होगा।”

विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा ने कहा कि वैश्विक तपन और जलवायु परिवर्तन की समस्या सुलझाने के लिए वैज्ञानिक तर्को के साथ सांस्कृतिक पुनर्जागरण की जरूरत होगी।

उन्होंने कहा, “ग्लोबल वार और ग्लोबल वार्मिग दो बड़े मुद्दे दुनिया के सामने हैं और ये अब विकराल रूप ले ले चुके हैं।”

राज्यसभा सदस्य एवं आयोजन समिति के अध्यक्ष अनिल माधव दवे ने दो दिनों में चले 15 सत्रों के दौरान हुए विचार-विमर्श का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। राज्य के नगरीय विकास एवं पर्यावरण मंत्री लाल सिंह आर्य ने आभार व्यक्त किया।

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