‘भारतीय शैक्षणिक संस्थानों में योग्य शिक्षकों की कमी’

सोमरिता घोष

सोमरिता घोष

नई दिल्ली, 30 मार्च (आईएएनएस)। ऑर्ट ऑफ लिविंग के एक वरिष्ठ संकाय सदस्य के अनुसार भारतीय शैक्षणिक व्यवस्था की प्रमुख खामियों में से एक अच्छे योग्य शिक्षकों की कमी है।

खुर्शीद बाटलीवाला ने आईएएनएस से कहा, “भारतीय शिक्षा प्रणाली बुरी नहीं है, बल्कि समस्या योग्य शिक्षकों की कमी है। शिक्षण के जुनून या वित्तीय कारणों के बिना अच्छे शिक्षक शिक्षण के क्षेत्र में नहीं आते।”

बाटलीवाला ने दिनेश घोडके के साथ मिलकर ‘रेडी स्टडी गो’ (हार्परकोलिंस, 149 रुपये) नामक किताब लिखी है, जो छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करने और अपने पाठ्यक्रमों के प्रति रुझान पैदा करने का रास्ता बताती है।

बाटलीवाला ऑर्ट ऑफ लीविंग से 25 सालों से जुड़े हैं। उन्होंने कहा, “स्कूलों और कॉलेजों में 100 फीसदी अंक पाने वाले लोगों में से भी ज्यादातर को कोई ज्ञान नहीं होता। वह बुनियादी तौर पर कुछ नहीं जानते। हर तर्क के पीछे एक कारण होता है, लेकिन खुद ही कम ज्ञान रखने वाले शिक्षक सीखने का जुनून पैदा करने में असमर्थ होते हैं। इसके बजाय वे केवल अच्छा ग्रेड लाने पर ही जोर देते हैं।”

बाटलीवाला ने यह भी कहा कि शिक्षकों को स्कूली पाठ्यक्रम सिखाने के मामले में नए तरीके आजमाने चाहिए।

बाटलीवाला (47) ने कहा, “किसी भी शिक्षक को स्कूल की पाठ्यपुस्तकों को पढ़ाते हुए रचनात्मकता अपनानी चाहिए। किसी भी पाठ्यक्रम को साधारण तरीके से पढ़ाए जाने से तर्कशीलता का विकास कभी नहीं होगा। नवाचार और व्यावहारिक दृष्टिकोण से छात्रों को विषयों को ज्यादा बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी।”

अच्छे ग्रेड लाने की होड़ के बारे में बात करते हुए बाटलीवाला ने कहा, “ग्रेड किसी भी छात्र की क्षमताओं का आकलन करने का मापदंड नहीं हो सकता। प्रमाण पत्र या एक अंक पत्र किसी छात्र की पहचान नहीं होना चाहिए। हालांकि इस धारणा को इतनी जल्दी बदलना आसान नहीं है, लेकिन फिर भी इसके लिए प्रयास शुरू हो गए हैं। गूगल जैसी कंपनियां अंकपत्र को महत्व नहीं देतीं, बल्कि कौशल जांचती हैं।”

बाटलीवाला ने उस आम मान्यता में विश्वास जताया कि बच्चों को सही शिक्षा के लिए प्रेरित करने में शैक्षिक संस्थानों के साथ-साथ माता-पिता की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण होती है।

आईआईटी पोवई से गणित में एमएससी कर चुके बाटलीवाला ने बताया कि ‘शिक्षा पूरी करने के बाद गणित पढ़ाकर लोगों की जिंदगी जटिल बनाने की जगह, उन्होंने ध्यान सिखाकर लोगों के जीवन में खुशी लाने’ का फैसला किया।

‘सफलता का मंत्र’ पूछने पर उन्होंने कहा, “नाकामी से घबराएं नहीं। कई लोग केवल इसलिए नई चीजें नहीं आजमाते क्योंकि वे ऐसा करने से डरते हैं।”

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