नई दिल्ली, 1 दिसम्बर (आईएएनएस)। भारत के शीर्ष पहलवानों में गिने जाने वाले बजरंग पुनिया का कहना है कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि रियो ओलंपिक-2016 में 65 किलोग्राम वर्ग में देश का नेतृत्व कौन करता है, बल्कि अहम यह है कि इस वर्ग से देश को एक पदक मिले।
नई दिल्ली, 1 दिसम्बर (आईएएनएस)। भारत के शीर्ष पहलवानों में गिने जाने वाले बजरंग पुनिया का कहना है कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि रियो ओलंपिक-2016 में 65 किलोग्राम वर्ग में देश का नेतृत्व कौन करता है, बल्कि अहम यह है कि इस वर्ग से देश को एक पदक मिले।
‘युनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (यूडब्ल्यूडब्ल्यू)’ द्वारा पिछले वर्ष कुश्ती के नियमों और भारवर्गो में बदलाव किए जाने के बाद पुनिया और ओलंपिक कांस्य पदक विजेता योगेश्वर दत्त दोनों 65 किलोग्राम भारवर्ग में प्रतिस्पर्धा करेंगे।
हालांकि रियो ओलम्पिक में इस भारवर्ग में केवल एक ही प्रतिभागी भारत का प्रतिनिधित्व कर सकता है।
बुडापेस्ट विश्व चैम्पियनशिप-2013 में कांस्य पदक जीतने वाले 21 वर्षीय बजरंग ने आईएएनएस से सोनीपत से फोन पर दिए साक्षात्कार में कहा, “हम दोनों एक ही वर्ग में प्रतिस्पर्धा करेंगे। देखते हैं क्या होगा? अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।”
पुनिया ने कहा, “पहले हमें रियो ओलम्पिक के लिए क्वालीफाई करना है और जिसे भी भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) योग्य समझेगा, वह ओलम्पिक में देश का प्रतिनिधित्व करने जाएगा।”
उन्होंने कहा, “इस भारवर्ग में अभी ट्रायल भी होने हैं। मुद्दा यह नहीं है कि भारत का नेतृत्व कौन करेगा। मैं 2008 से योगेश्वर के साथ हूं और वह मेरे लिए गुरू समान हैं। अहम यह है कि ओलम्पिक में देश का प्रतिनिधित्व करने वाला खिलाड़ी पदक लाए।”
बजरंग इस वर्ष की शुरुआत से ही शॉनदार फॉर्म में हैं। उन्होंने फरवरी में अमेरिका में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कुश्ती चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था, लेकिन पीठ की चोट के कारण उन्हें कई महीनों तक खेल से अलग रहना पड़ा।
लॉस वेगास में आयोजित विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य पदक मैच हारने वाले बजरंग ने कहा, “अमेरिका में स्वर्ण पदक जीतने के बाद मुझे पीठ में दर्द की समस्या शुरू हो गई। इसके कारण मैं कई महीनों तक रिंग से बाहर रहा। मैंने हाल ही में वापसी करते हुए विश्व चैम्पियनशिप में हिस्सा लिया, लेकिन अपना 100 प्रतिशत नहीं दे पाया।”
बजरंग अब प्रो कुश्ती लीग (पीडब्ल्यूएल) में हिस्सा लेंगे। 10 से 27 दिसंबर के बीच होने वाली प्रतियोगिता देश की पहली कुश्ती लीग प्रतियोगिता है।
पीडब्ल्यूएल के बारे में बजरंग ने कहा, “इस लीग से भारतीय पहलवानों को काफी मदद मिलेगी। इससे पहले हम प्रशिक्षण के लिए विदेश जाते थे, लेकिन अब दुनिया भर से पहलवान यहां आएंगे।”
बजरंग का मानना है कि पीडब्ल्यूएल से पहलवानों को रियो ओलम्पिक से पहले तैयारी में मदद मिलेगी, जिसका वह लाभ उठा सकते हैं।
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