नई दिल्ली, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय सोमवार को किसान संगठनों की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें दोबारा जारी किए गए भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को रद्द करने की मांग की गई है।
नई दिल्ली, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय सोमवार को किसान संगठनों की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें दोबारा जारी किए गए भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को रद्द करने की मांग की गई है।
किसानों का कहना है कि यह विधेयक संविधान विरुद्ध और अनैतिक है, इसलिए इसे लागू करने से सरकार को रोका जाना चाहिए।
प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति एच.एल.दत्तू तथा न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की पीठ ने शुक्रवार को कहा कि इस मामले पर सुनवाई होगी। इससे पहले वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने याचिका पर जल्द सुनवाई की अपील की।
भारतीय किसान संघ, दिल्ली ग्रामीण समाज, ग्राम सेवा समिति तथा चोगामा विकास आवाम ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा है कि भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजे का अधिकार तथा पारदर्शिता, पुनर्वास एवं पुनस्र्थापन (संशोधन) अध्यादेश, 2015 असंवैधानिक, अशक्त, निर्थक तथा संविधान के अनुच्छेद 14 व 123 का उल्लंघन करता है, इसलिए इसे अवैध माना जाए।
अध्यादेश को संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करार देते हुए किसान संगठनों ने कहा है कि इसने संविधान से भी धोखाधड़ी की है।
याचिकाकर्ताओं ने दलील दी है कि सरकार की अध्यादेश को दोबारा जारी करने की कार्रवाई नेक नहीं थी और यह अध्यादेश राज जैसा व्यवहार कर रही है, इसलिए इसे चुनौती दी गई है।
याचिका में इस बात पर जोर दिया गया है कि सरकार ने अध्यादेश को दोबारा जारी कर संवैधानिक नैतिकता के सभी सिद्धांतों को ताक पर रख दिया।
याचिकाकर्ता संगठनों ने कहा है कि संविधान के तहत कानून बनाने का अधिकार संसद के पास है और विधायिका द्वारा इसका दुरुपयोग नहीं किया जा सकता।
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