इंफाल, 5 मार्च (आईएएनएस)। मणिपुर की राजधानी इंफाल के पूर्वी जिले में बुधवार की रात आत्मामर्पण करने वाले उग्रवादियों के शिविर पर हुए हमले की जिम्मेदारी माओवादी कम्युनिस्ट पार्टी (एमसीपी) ने ली है।
शांति शिविर पर उस रात करीब 20 मिनट तक स्वचालित राइफलों से गोलियां चलाई गईं और हाथ गोले फेंके गए, लेकिन शिविर में रहने वाला कोई व्यक्ति घायल नहीं हुआ।
नामित शिविर राज्य और केंद्र सरकार की ओर से बनाए गए हैं, जिनमें वे उग्रवादी रहते हैं, जिन्होंने ऑपरेशन स्थगित करने या संघर्ष विराम समझौते पर दस्तखत किए थे।
समझौते के तहत ये उग्रवादी संगठन और सुरक्षा बल एक दूसरे पर हमला नहीं करेंगे और समस्या का राजनीतिक हल निकालने के लिए शांति वार्ता का माहौल बनाएंगे। इन उग्रवादियों को स्टाइपेंड के रूप में निश्चित राशि मिलनी भी शुरू हो गई है।
उल्लेखनीय है कि मणिपुर में 18 उगवादी संगठनों ने संघर्ष विराम समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन अब भी दर्जनों ऐसे संगठन हैं जो सक्रिय हैं और सुरक्षा बलों पर घात लगा कर हमला करते रहते हैं।
खास बात यह है कि इन शिविरों के निकट पुलिस थाना, पुलिस कमांडो शिविर, सीमा सुरक्षा बल और असम राइफल्स के श्ििवर हैं। बावजूद इसके बुधवार की रात उग्रवादी हमला करने में सफल हो गए। और सुरक्षा बलों के बिना किसी विरोध के घटनास्थल से लौटने में सफल हो गए।
हमले को लेकर जारी बयान में एमसीपी के प्रवक्ता ने शुक्रवार को कहा कि एमसीपी उन लोगों को कभी नहीं बख्शेगा जो माओवाद, लेनिनवाद और मार्क्सवाद को बदनाम कर रहे हैं। ऐसी जानकारी मिली है कि नामित शिविरों में रहने वाले लोग मादक पदार्थो का सेवन करते हैं और ग्रामीणों और मजदूरों को डरा कर उनसे पैसे वसूलते हैं।
उधर, नामित शिविरों के लोगों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि वे सटाइपेंड की राशि से ही गुजारा करते हैं। धटना के मद्देनजर सरकार इन शिविरों को विष्णुपुर जिले में ज्यादा सुरक्षित जगह पर स्थानांतरित करना चाहती है।
बताया जा रहा है कि उग्रवादियों में इस बात पर सहमति है कि जो लोग ऑपरेशन स्थगित समझौता कर सार्वजनिक जीवन जी रहे हैं, उन्हें निशाना बनाया जाए। पहले भी एसओएस के बाहर रहने वालों को छापामारों ने निशाना बनाया था। उनका अपहरण और हत्या तक की गई थी।
संघर्ष विराम करने वाले उग्रवादियों की भी अपनी शिकायतें हैं। उनका कहना है कि स्टाइपेंड की छोटी रकम से वे लाभप्रद रोजगार का इंतजाम नहीं कर सकते हैं। उनका कहना है कि केंद्र सरकार वार्ता शुरू करने के लिए कोई पहल नहीं कर रही है।
इस संबंध में अधिकारियों ने आईएएनएस से कहा कि समर्पण करने वाले उग्रवादियों से वार्ता शुरू करना मुश्किल है, क्योंकि अधिकांश उग्रवादी संगठन संघर्ष विराम के लिए राजी नहीं हैं।
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