मणिपुर के 3 विधेयकों की मंजूरी के लिए दिल्ली में लगाएंगे जोर

इंफाल, 17 मई (आईएएनएस)। मणिपुर में प्रवासियों के प्रवेश पर लगाम लगाने से जुड़े तीन विधेयकों को राष्ट्रपति की मंजूरी दिलाने के लिए राज्य की राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों ने एक ज्ञापन का मसौदा तैयार किया है। इसे मणिपुर के राजनीतिक प्रतिनिधि अपने केंद्रीय स्तर के नेताओं को देंगे ताकि वे इन पर राष्ट्रपति की मंजूरी लेने के लिए पहल कर सकें।

एक अधिकारी ने यहां कहा कि मणिपुर के उप मुख्यमंत्री गईखंगम की अध्यक्षता में एक कमेटी ने ज्ञापन का मसौदा तैयार कर लिया है।

उन्होंने कहा, “इसे मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह को सौंप दिया जाएगा, जिसे वे राजनीतिक पार्टियों के अगले दौर की बैठक में पेश करेंगे।”

तीनों विधेयकों द प्रोटेक्शन आफ मणिपुर पीपुल बिल 2015, मणिपुर लैंड रेवेन्यू एंड लैंड रिफार्म (सातवां संशोधन) बिल 2015 तथा मणिपुर शाप्स एंड इस्टैबलिशमेंट (द्वितीय संशोधन) बिल 2015, को राज्य विधानसभा ने पिछले साल पारित किया था।

इससे पहले, राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों को सोमवार को नई दिल्ली का दौरा करना था, जिसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है।

एक स्थानीय पार्टी के नेता ने कहा, “प्रतिनिधियों की तरफ से जान बूझकर देरी समझ में आती है। ज्वाइंट कमेटी ऑन इनर लाइन परमिट सिस्टम्स (जेसीआईएलपीएस) के नेताओं ने घोषणा की है कि प्रतिनिधियों को विधेयकों को मंजूरी दिलाने के लिए केंद्रीय नेताओं को अच्छी तरह से समझाने की जरूरत होगी।”

उन्होंने कहा कि प्रतिनिधियों का राज्य में तभी स्वागत किया जाएगा, जब वे सफलता प्राप्त कर लौटेंगे। लेकिन, अगर असफलता हाथ लगी तो फिर उनकी खैर नहीं।

उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति इन विधेयकों को मंजूरी देने से लगातार इनकार करते रहे हैं। उम्मीद नहीं है कि वह इसे मंजूर करेंगे।”

जेसीआईएलपीएस के कार्यकर्ता विधेयकों को तत्काल लागू करने के लिए सड़क यातायात बाधित करने के साथ-साथ विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।

जेसीआईएलपीएस के संयोजक खोमदरम रतन ने कहा, “विधेयकों को मंजूरी मिलने तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा।”

वहीं दूसरी ओर, विचाराधीन विधेयकों पर प्रस्तावित वार्ता के दौरान केंद्रीय नेताओं को कड़ा संदेश देने के इरादे से 48 घंटों के बंद को लेकर नागा व कुकी संगठनों के बीच दरार पैदा हो गई है।

इस बीच, कुकी इंपी मणिपुर (केआईएम) तथा कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन (केएनओ) ने कुकी समुदाय से बंद का आयोजन नहीं करने के लिए कहा है।

कुल 18 कुकी विद्रोही समूहों के संगठन केएनओ ने कहा, “सरकार ने 1992-97 के दौरान एनएससीएन (आईएम) के अत्याचारों के पीड़ित कुकियों का पुनर्वास अभी तक नहीं किया है। बंद का आयोजन करने वालों को जवाबदेह बनना होगा।”

केआईएम ने कहा, “13 मई को एक प्रारंभिक बैठक हो चुकी है और दूसरे दौर की बैठक 20 मई को होगी। इसलिए, अब बंद करने का सवाल ही नहीं उठता।”

लेकिन, मणिपुर के जनजातीय समुदायों के प्रमुखों के मंच ने जनजातीय इलाकों में बंद का समर्थन किया है।

उल्लेखनीय है कि पूर्वोत्तर राज्यों के कुछ निश्चित इलाकों में प्रवेश के लिए एक विशेष परमिट ‘आईएलपी’ की जरूरत पड़ती है। यह प्रणाली अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड व मिजोरम में पहले से ही लागू है।

इसे सबसे पहले अंग्रेजों ने लागू किया था, जिसका उद्देश्य अपने वाणिज्यिक हितों की रक्षा करना था।

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